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महाकाल मंदिर में नहीं मनेगी होली, बाबा को चढ़ाया जाएगा प्रतीकात्मक रंग, परिसर में अबीर-गुलाल ले जाना प्रतिबंधित

Written by:Diksha Bhanupriy
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बाबा महाकाल के आंगन में हर साल होली का उल्लास देखने को मिलता है। इस बार भी महाकाल के आंगन में सबसे पहले होली का पर्व मनाया जाएगा। पिछले साल हुई घटना के बाद समिति द्वारा इस बार सख्त नियम जारी किए गए हैं।
महाकाल मंदिर में नहीं मनेगी होली, बाबा को चढ़ाया जाएगा प्रतीकात्मक रंग, परिसर में अबीर-गुलाल ले जाना प्रतिबंधित

विश्व प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर के आंगन में हर तीज त्यौहार सबसे पहले मनाया जाता है। अब यहां होली भी सबसे पहले मनाई जाएगी। देशभर में जहां 13 मार्च को होलिका दहन और 14 मार्च को धुलेंडी का पर्व मनाया जाएगा तो महाकाल के आंगन में 13 मार्च को ही रंग गुलाल उड़ने लगेगा।

आज बाबा महाकाल के आंगन में होलिका दहन के साथी संध्या आरती के समय राजाधिराज को गुलाल अर्पित किया जाएगा। पिछले साल होली के समय महाकाल में हादसा हो गया था। जिस वजह से इस बार काफी एहतियात बरता जा रहा है। पंडित पुजारियों को मंदिर समिति की तरफ से गुलाल उपलब्ध करवाया जाएगा। वहीं होलिका दहन और होली उत्सव मनाने के लिए मंदिर में आने वाले श्रद्धालु अपने साथ रंग गुलाल लेकर नहीं जा सकेंगे।

सबसे पहले महाकाल की होली (Mahakal Holi)

महाकालेश्वर मंदिर में वर्षों से सबसे पहले होली का पर्व मनाने की परंपरा चली आ रही है। इस बार भी मंदिर में ही पारंपरिक रूप से होली मनाई जाएगी। संध्या आरती में बाबा को सांकेतिक गुलाब अर्पित किया जाएगा। इसके बाद पुजारी परिवार ऊपरी तल पर स्थित ओंकारेश्वर मंदिर के सामने कंडो की होली का सजाकर इसका दहन करेंगे। संध्या आरती के बाद पुजारी परिवार की महिलाएं भी पूजन अर्चन करेंगी।

हर्बल गुलाल का होगा उपयोग

पिछले साल केमिकल वाले गुलाब की वजह से मंदिर में आग देने की घटना हो गई थी जिसके चलते इस बार मंदिर समिति ने केवल 1 किलो गुलाल बाबा को अर्पित करने का निर्णय लिया है। इसी के साथ श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार का रंग गुलाल लेकर मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। 14 मार्च को भस्म आरती में जो होली खेली जाती है उस दौरान हर्बल गुलाल और अबीर बाबा को अर्पित होगा।

मंदिर समिति ने जारी की गाइडलाइन

  • महाकाल मंदिर में होली उत्सव को लेकर मंदिर समिति ने जो गाइडलाइन जारी की है। उसके मुताबिक बाबा को केवल 1 किलो गुलाल अर्पित किया जाएगा।
  • पंडे पुजारी या श्रद्धालु अपने साथ रासायनिक रंग गुलाल लेकर मंदिर में प्रवेश नहीं करेंगे।
  • बाबा को हर्बल गुलाल और गेहूं की बालियां चढ़ाई जाएगी।
  • गर्भ गृह से लेकर गणेश मंडपम, कार्तिकेय मंडपम, नंदी मंडपम और मंदिर परिसर में रंग गुलाल ले जाना प्रतिबंधित है।
  • 13, 14 मार्च और 19 मार्च को रंग पंचमी के दिन रंग गुलाल और कलर गन का इस्तेमाल पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है।
  • मंदिर परिसर में रंग गुलाल उड़ाने, आपस में होली खेलने और किसी भी तरह के उपकरण से रंग उड़ाने पर प्रतिबंध लगाया गया है।

जांच के बाद मिलेगा प्रवेश

मंदिर में कोई भी व्यक्ति अपने साथ केमिकल युक्त रंग गुलाल लेकर प्रवेश न करें। इसके लिए जांच के बाद प्रवेश दिया जाएगा। प्रवेश द्वार पर हर श्रद्धालु की चेकिंग की जाएगी। इसी के साथ कंट्रोल रूम में बैठे कर्मचारी कैमरा के माध्यम से पूरे मंदिर परिसर पर निगरानी रखेंगे।

बदलेगी बाबा महाकाल की दिनचर्या

होली के बाद बाबा महाकाल की दिनचर्या में भी परिवर्तन आता है। वर्ष में दो बार यह परिवर्तन किया जाता है। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से ठंड के मुताबिक आरती का समय तय होता है। वहीं चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से गर्मी के मुताबिक समय निर्धारित किया जाता है। 15 मार्च से बाबा महाकाल के दिनचर्या भी बदल जाएगी। अब उन्हें ठंडे जल से स्नान करवाया जाएगा जो शरद पूर्णिमा तक चलेगा। दिन में होने वाली पांच में से तीन आरतियों का समय भी बदलेगा।

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Diksha Bhanupriy
लेखक के बारे में
"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy
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