सिंहस्थ 2028 से पहले संतों ने उठाया शिप्रा शुद्धिकरण का मुद्दा, बोले- शुद्ध जल से स्नान हमारी प्राथमिकता

सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच संत समाज ने शिप्रा शुद्धिकरण का मुद्दा उठाया है। संतों का कहना है कि देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को शुद्ध जल से स्नान कराना उनकी प्राथमिकता है। ऐसे में शिप्रा में नालों का दूषित पानी मिलने से रोकना आवश्यक है।
Simhasth 2028

उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 में देश विदेश से करोड़ों की संख्या में साधु संत और आम नागरिक शिप्रा स्नान के लिए पहुंचेंगे। इस वृहद आयोजन को लेकर तैयारी जोर शोर से की जा रही है। इसी बीच संत समाज को शिप्रा शुद्धिकरण का मुद्दा उठाते हुए देखा गया।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष डॉक्टर रामेश्वर दास के नेतृत्व में एक दर्जन से ज्यादा संत उज्जैन से देवास पहुंचे। यहां उन्होंने नागधम्मन नदी और शिप्रा मिलने वाले नालों का निरीक्षण किया। संतों का कहना है कि सिंहस्थ से पहले शिप्रा को हर हाल में स्वच्छ करना जरूरी है।

दूषित पाने देख जताई नाराजगी

हवनीखेड़ी में संतों ने जब नागधम्मन नदी में बह रहे काले और दूषित पानी को देखा तो इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए दिखाई दिए। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने कहा कि वह पहले भी यहां आ चुके हैं लेकिन किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि शिप्रा में मिलने वाला दूषित पानी हर हाल में बंद कराया जाए।

संतों का क्या कहना

शिप्रा में मिल रहे दूषित जल के बारे में संतों का कहना है कि यह पानी इतना ज्यादा दूषित है कि ट्रीटमेंट के बाद भी पीने योग्य नहीं है। ऐसे में जीव जंतुओं का जीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि आंदोलन या फिर सड़क जाम करना संतों का काम नहीं है लेकिन प्रशासन से समाधान करवाना उनकी जिम्मेदारी है। अगर जरूरत पड़ती है तो वह भोपाल में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस विषय को उठाएंगे। अगर शिप्रा स्वच्छ नहीं हुई तो मुख्यमंत्री को यहां लाकर वास्तविक स्थिति दिखाई जाएगी।

कलेक्टर से की मुलाकात

मौके का निरीक्षण करने के बाद संतों का दल कलेक्टर कार्यालय पहुंचा। जहां शिप्रा शुद्धिकरण को लेकर अधिकारियों से चर्चा की गई। प्रशासन ने आश्वासन दिया है की फैक्ट्री ट्रीटमेंट किए गए पानी को शिप्रा में नहीं छोड़ा जाए। इसके लिए एक परियोजना तैयार की जा रही है, जिसे जल्द मंजूरी दिलाई जाएगी। जून 2027 से पहले शिप्रा में दूषित पानी मिलना बंद कर दिया जाएगा।

Diksha Bhanupriy
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