सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन पहुंचे स्वामी अवधेशानंद गिरि ने निजी होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में कई अहम विषयों पर अपनी बात रखी है। दरअसल उन्होंने कहा कि अवंतिका की धार्मिक पहचान और प्राचीन परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए विकास कार्य आगे बढ़ने चाहिए। स्वामी अवधेशानंद गिरि के मुताबिक सिंहस्थ को लेकर शहर में उत्साह और प्रशासन की तैयारियां सकारात्मक संकेत हैं।
दरअसल स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि उज्जैन को शास्त्रों में अजर-अमर, अपराजेय और मोक्ष देने वाली नगरी बताया गया है। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ 2028 की तैयारियों में सरकार और प्रशासन सक्रिय नजर आ रहे हैं साथ ही जनता में भी आयोजन को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है।
संत समाज विकास का विरोध नहीं करता: स्वामी अवधेशानंद गिरि
वहीं स्वामी अवधेशानंद गिरि के मुताबिक इतना बड़ा धार्मिक आयोजन तभी सफल होगा जब विकास और परंपरा दोनों साथ-साथ चलें। उन्होंने साफ कहा कि विकास करना सरकार की जिम्मेदारी है और संत समाज उसका विरोध नहीं करता है। जरूरत पड़ने पर अखाड़े और साधु-संत सहयोग के लिए हमेशा तैयार हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि अखाड़ों, संतों और प्राचीन धर्मस्थलों से जुड़े विषयों पर कोई भी फैसला लेने से पहले आपसी चर्चा और सहमति जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने काशी कॉरिडोर, अयोध्या, केदारनाथ और महाकाल लोक जैसे विकास कार्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे कामों में संत समाज ने भी सहयोग दिया है।
जेन-जी को लेकर क्या कहा?
दरअसल युवाओं को लेकर पूछे गए सवाल पर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि हर दौर में युवाओं ने समाज को नई दिशा दी है। उनके मुताबिक आज की जेन-जी तकनीक, गैजेट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में सोचती है इसलिए उनकी बात सुनना जरूरी है। उन्होंने कहा कि युवाओं को यह कहकर अलग नहीं किया जाना चाहिए कि वे अभी परिपक्व नहीं हैं बल्कि उनकी सोच और अनुभवों को समाज के विकास में जगह मिलनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा को देश की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक बताते हुए कहा कि इसमें लगातार नए प्रयोग और तकनीक को बढ़ावा देना चाहिए। भारत की ज्ञान परंपरा, वेद-पुराण और संस्कारों का भी जिक्र इस दौरान उन्होंने किया।






