प्रशासन ने दी छूट तो बाजारों में उमड़ा सैलाब, शादी की खरीदारी के लिए लगी भीड़

प्रशासन ने दी छूट तो बाजारों में उमड़ा सैलाब, शादी की खरीदारी के लिए लगी भीड़

उज्जैन, डेस्क रिपोर्ट।  शादी के सीजन को देखते हुए जिला प्रशासन ने कुछ छूट देने का आदेश निकाला था, लेकिन उसके बाद बाजारों में जो नजारा दिखा उसने सबके होश उड़ा दिये। शहर में ऐसी भीड़ लगी कि कहीं से लगा ही नहीं की हम कोरोना काल में संक्रमण के आपातकाल से गुजर रहे हैं। आम दिनों की तरह सामान्य भीड़ से भी अधिक भीड़ शहर के हर चौराहे पर देखने को मिली। मजमा इतना बढ़ गया कि आखिर ट्रैफिक पुलिस की ड्यूटी लगानी पड़ी। ये नजारा तब है कि जब हम अस्पताल, ऑक्सीजन और रेमडेसिवीर की कमी से जूझ रहे हैं। खासकर गोपाल मंदिर पर तो ऐसा नजारा था जैसे कि सामान्य समय में त्यौहारों पर भीड़ जुटती है।

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दरअसल 17 अप्रैल को क्राइसेस मैनेजमेंट की मीटिंग में समस्त जनप्रतिनिधियों और जिले के आला अधिकारियों ने मिलकर निर्णय लिया था कि कोरोना से निपटने के लिए कोरोना कर्फ्यू को 26 अप्रैल तक बढ़ाया जाए। इसके अलावा आगामी शादियों के सीजन को देखते हुए  19 अप्रैल से  सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच कुछ दुकानों को छूट देने का प्रस्ताव भी रखा गया। इनमें ज्वेलरी, कपड़े, बर्तन सहित अन्य दुकानों को शामिल कर सुबह 8 से 12 के बीच खोलने की अनुमति दी गई थी। लेकिन आदेश में साफ़ कहा गया था कि जिसके घर में शादी है केवल वो ही बाहर निकलेंगे और दुकानदार शादी की पत्रिका देखकर सामान देंगे। लेकिन शहर के फ्री गंज, एटलस चौराहे, गोपाल मंदिर, ढाबा रोड सहित उन्हले और नागदा में भी ये हाल रहा कि बाजार में कदम रखने को जगह नहीं थी। कोरोना काल में दी गई छूट का लोगों ने कुछ इस तरह बेजा फायदा उठाया जैसे कोई बीमारी है ही नहीं।

उज्जैन में सादगी से शादी करने की परमिशन तो दे दी गई है।  जिला स्तरीय क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी ने इसके लिए क्राइटेरिया फिक्स कर दिया है। वर-वधू पक्ष से 25-25 लोग शादी समारोह में शामिल हो सकेंगे। कलेक्टर ने साफ कर दिया है शादी विवाह में बैंड बाजे डीजे आदि की अनुमति नहीं दी जाएगी। सोमवार से शादी की खरीदारी के लिए छूट का आदेश रविवार को ही निकाला गया था, जिसमे साफ़ कहा गया था बर्तन ज्वलरी कपड़े की दुकाने खुल रहेंगी। लेकिन फ्री गंज क्षेत्र में जैसे ही ये दुकाने खुली पुलिस वालों ने तत्काल सभी दुकानों को बंद करवा दिया। पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन के आपस में सामंजस्य नहीं होने के चलते आम लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा।

Shruty Kushwaha
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Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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