उज्जैन के प्रसिद्ध गढ़कालिका मंदिर में एक किन्नर साध्वी के हंगामे के बाद मंदिर परिसर में तनाव का माहौल बन गया है। दरअसल इस घटना ने पुजारियों और मंदिर से जुड़े विभिन्न संगठनों में भारी आक्रोश भर दिया है। रविवार को हुए इस विवाद के विरोध में अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने कड़ी निंदा की है और मध्य प्रदेश में ‘पुजारी सुरक्षा एक्ट’ लागू करने की मांग उठाई है। महासंघ ने कलेक्टर और प्रशासन से इस मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई करने की भी अपील की है।
दरअसल अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पुजारी ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। वहीं उन्होंने बताया कि बीते 17 मई को मंदिर परिसर में एक किन्नर साध्वी ने जमकर अराजकता फैलाई थी। आरोप है कि इस दौरान साध्वी ने मंदिर के पुजारियों और वहां कार्यरत कर्मचारियों के साथ न केवल अभद्रता की, बल्कि उन्हें गाली-गलौज भी किया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि किन्नर साध्वी ने निर्वस्त्र होकर पेट्रोल डालकर आत्मदाह का प्रयास तक किया। इसके साथ ही, उन्होंने मंदिर प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप भी लगाए।
महासंघ ने अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी सार्वजनिक स्थल पर आत्मदाह का प्रयास करना या इस प्रकार का तनावपूर्ण माहौल पैदा करना कानूनन एक गंभीर अपराध है। इसलिए प्रशासन को चाहिए कि वह इस पूरे मामले का तत्काल संज्ञान ले और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ उचित कानूनी धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज करे। यह आवश्यक है ताकि धार्मिक स्थलों पर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
जानिए क्या है आरोप
पुजारी महासंघ ने यह भी आरोप लगाया है कि आजकल मंदिरों में कुछ लोग साधु-संतों के वेश में आकर लगातार दबंगई का माहौल बना रहे हैं। ऐसे व्यक्ति मंदिर समितियों द्वारा बनाए गए नियमों और स्थापित परंपराओं का बिल्कुल भी पालन नहीं करते। वे धार्मिक स्थलों की पवित्र मर्यादा को भंग करते हैं, जिससे श्रद्धालुओं और पुजारियों दोनों को ही असहज स्थितियों का सामना करना पड़ता है। महासंघ ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे तत्वों के कारण स्थानीय पुजारियों और सामान्य श्रद्धालुओं को लगातार परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।
महासंघ ने भविष्य को लेकर आशंकाएं व्यक्त कीं
महासंघ ने भविष्य को लेकर भी अपनी आशंकाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे विवादित और अराजकता फैलाने वाले तत्वों पर समय रहते प्रभावी ढंग से रोक नहीं लगाई गई, तो आगामी सिंहस्थ जैसे बड़े और महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में कानून-व्यवस्था और मंदिर की व्यवस्थाएं संभालना अत्यंत कठिन हो जाएगा। करोड़ों की संख्या में एकत्रित होने वाले श्रद्धालुओं की उपस्थिति में इस प्रकार की घटनाएं कानून-व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती बनकर उभर सकती हैं।
महासंघ ने सरकार से की मांग
अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने सरकार से एक महत्वपूर्ण मांग की है। उनकी मांग है कि जिस प्रकार अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों, कर्मचारियों और सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष कानून लागू किए गए हैं, उसी तर्ज पर मंदिरों और वहां के पुजारियों की सुरक्षा के लिए भी एक अलग और सशक्त कानून बनाया जाए। महासंघ का दृढ़ता से कहना है कि “पुजारी सुरक्षा एक्ट” को लागू करके ही धार्मिक स्थलों पर कार्य करने वाले पुजारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा को सही मायने में सुनिश्चित किया जा सकता है। यह एक्ट मंदिरों की गरिमा बनाए रखने और वहां शांतिपूर्ण माहौल सुनिश्चित करने में सहायक होगा।






