आज अमावस्या की तिथि है और दिन शनिवार होने की वजह से इसे शनिश्चरी अमावस्या के तौर पर मनाया जा रहा है। ज्योतिष के मुताबिक 13 साल बाद विशेष संयोग शनि जयंती और शनिश्चरी अमावस्या का पर्व मनाया जा रहा है। यही कारण है कि उज्जैन स्थित त्रिवेणी घाट पर बने शनि मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त दर्शन करने के लिए पहुंच रहे हैं। यहां देर रात से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया था।
त्रिवेणी घाट पर बड़ी संख्या में आसपास के इलाकों से श्रद्धालु पहुंचते हैं और स्नान दान कर दर्शन लाभ लेते हैं। इन श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए प्रशासन ने नदी में स्नान के लिए फव्वारों की व्यवस्था की है। श्रद्धालु आसानी से इन फव्वारों में स्नान कर दर्शन लाभ लेते दिखाई दे रहे हैं।
विशेष संयोग में शनि जयंती और अमावस्या
बता दें उज्जैन में शनि जयंती और शनि अमावस्या विशेष महासंयोग में पड़ रहा है। इस वजह से शनि मंदिर में दिनभर विशेषण अनुष्ठान देखने को मिलेंगे। तड़के जब से मंदिर के पट खुले हैं तब भगवान का पंचामृत पूजन अभिषेक किया गया। इसके बाद से भक्तों को दर्शन करने के लिए मंदिर में प्रवेश दिया गया। मंदिर को विशेष तौर पर पुष्प और विद्युत सज्जा से सजाया गया है। गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं की एंट्री पूरी तरह से बंद है। यहां 24 घंटे तक तेल अर्पण जारी रहने वाला है।
देश भर से आए श्रद्धालु
त्रिवेणी स्थित शनि मंदिर पर देशभर से आए श्रद्धालु स्नान दान और दर्शन करते दिखाई दे रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक भक्त पहले शिप्रा नदी में स्नान करते हैं और अपने जूते चप्पल और कपड़े मंदिर के बाहर दान के स्वरूप में छोड़ देते हैं। इसके बाद शनि देव को तेल, नारियल, काला कपड़ा और काले तिल अर्पित कर दान करने किया जाता है। ऐसा कहते हैं कि जो व्यक्ति यहां तेल चढ़ता है उसे शनि दोष, ढैया और साढ़ेसाती से मुक्ति मिलती है।
फव्वारों से चल रहा स्नान
त्रिवेणी घाट पर प्राचीन नवग्रह शानी मंदिर स्थित है। जहां दर्शन के लिए जुटे श्रद्धालुओं के लिए फव्वारों से स्नान की व्यवस्था प्रशासन द्वारा की गई है। बता दे कि फिलहाल से हंस के कार्यों की वजह से नदी का जलस्तर कम है ऐसे में नर्मदा नदी से जल लाकर स्नान की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस, होमगार्ड और SDRF की टीम को तैनात किया गया है।






