उज्जैन में सियासी ड्रामे की कोई कमी नहीं रहती, लेकिन सोमवार को किसान कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान जो हुआ, उसने सबको हैरत में डाल दिया। दरअसल, किसान कांग्रेस अध्यक्ष अशोक जाट को जिलाबदर किए जाने के विरोध में कांग्रेस ने उग्र प्रदर्शन का बिगुल बजाया था। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर तू-तू मैं-मैं हुई, नौबत लाठीचार्ज तक आ पहुंची और एक किसान जयराम जाट घायल हो गए। पुलिस ने तीन अन्य लोगों को भी हिरासत में ले लिया।
लेकिन इन सबसे ज्यादा चर्चा में रहा एक वीडियो, जिसमें कांग्रेस विधायक महेश परमार एडिशनल एसपी आलोक शर्मा के पैर पड़ने के लिए उनके पीछे-पीछे घूमते दिखाई दे रहे थे। नेताजी सड़क पर दंडवत प्रणाम करने लगे, जबकि एडिशनल एसपी वहां से हटते नजर आए। यह दृश्य बताता है कि उज्जैन में सियासत किस हद तक पहुंच चुकी है और नेताजी किस तरह के पैंतरे आजमा रहे हैं।

इंदौर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
इधर, किसान नेता अशोक जाट ने जिलाबदर की इस कार्रवाई के खिलाफ इंदौर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है, जिस पर 13 मई को सुनवाई होनी है। अब देखना होगा कि अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है और क्या नेताजी को राहत मिल पाती है।
महिदपुर के नेताजी, विधायक दिनेश जैन बोस ने भी अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने साफ कहा कि वे किसानों की लड़ाई लड़ते रहेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें किसी भी हद तक जाना पड़े। नेताजी ने आरोप लगाया कि उज्जैन आते समय पुलिस ने उन्हें रोकने की भरसक कोशिश की, लेकिन वे डरने वाले नहीं हैं। यह बयान बताता है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं है और आगे भी ऐसे प्रदर्शनों की उम्मीद की जा सकती है।

महेश परमार ने अपने तेवर और तीखे किए
वहीं, कांग्रेस विधायक महेश परमार ने अपने तेवर और तीखे कर दिए। उन्होंने कहा कि किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अशोक जाट तो किसानों की आवाज पर हमेशा पहुंच जाते हैं, ऐसे नेता को जिलाबदर कर दिया गया। नेताजी ने तंज कसते हुए कहा कि उज्जैन में तो गुंडे खुलेआम घूम रहे हैं, उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। पुलिस ने किसी कांग्रेस कार्यकर्ता को कलेक्टर परिसर तक नहीं जाने दिया, यह कैसी व्यवस्था है? यह आरोप सीधे तौर पर प्रशासन पर सवाल खड़े करता है।

प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर को ज्ञापन देने के लिए बुलाया था, लेकिन कलेक्टर साहब नहीं पहुंचे। जाट समाज के युवा नेता राधे जाट ने बताया कि कांग्रेस, किसान संगठन और जाट समाज के लोग कलेक्टर का इंतजार करते रहे। जब कलेक्टर नहीं आए, तो प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पर ही ज्ञापन चस्पा कर अपना विरोध दर्ज कराया और प्रदर्शन समाप्त कर दिया। यह दिखाता है कि प्रशासन ने इस मामले को कितनी गंभीरता से लिया।
21 मई तक का अल्टीमेटम दिया
राधे जाट ने प्रशासन को सीधे तौर पर 21 मई तक का अल्टीमेटम दे दिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर अशोक जाट को नहीं छोड़ा गया और उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो 21 मई को प्रदेशभर में बड़ा प्रदर्शन होगा। अगला आंदोलन सीधे भोपाल में करने की तैयारी है। यह चेतावनी बताती है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है और सरकार के लिए नई मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
जानिए पूरा मामला
प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कांग्रेस विधायक महेश परमार, नेता मुकेश भाटी और किसान कार्यकर्ता ट्रैक्टरों के साथ उज्जैन पहुंच रहे थे। बड़नगर रोड स्थित ब्रिज के नीचे पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद तो हंगामा शुरू हो गया। करीब एक घंटे तक पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की चलती रही। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। लाठीचार्ज के बाद भगदड़ जैसी स्थिति बन गई, जिससे माहौल और बिगड़ गया।
प्रदेश किसान कांग्रेस अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह चौहान ने इस पूरे मामले की परतें खोलीं। उन्होंने बताया कि व्यापारी मंडियों से बाहर किसानों की फसल तुलवा रहे हैं और एक क्विंटल पर 8 से 10 किलो ज्यादा अनाज ले रहे हैं। किसान नेता अशोक जाट ने जब इस गोरखधंधे का विरोध किया और ऐसे व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई, तो उल्टा उन पर सरकारी कार्य में बाधा डालने का केस दर्ज कर उन्हें जिलाबदर कर दिया गया। यह तो हद ही हो गई! यह आरोप सीधे तौर पर किसानों के हितों की अनदेखी की ओर इशारा करता है।
इस प्रदर्शन में सिर्फ कांग्रेस कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि जाट समाज, सर्व समाज और आसपास के 10 गांवों के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। माहौल की गंभीरता को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था, ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे और स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सके।






