रंगपंचमी पर भस्म आरती में महाकाल को अर्पित होगा एक लोटा केसर जल, चेकिंग के बाद ही भक्तों को दिया जाएगा प्रवेश

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में रंगपंचमी पर भस्म आरती के दौरान इस बार भी भगवान महाकाल को सिर्फ एक लोटा केसर जल अर्पित किया जाएगा। मंदिर समिति ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा व्यवस्था के तहत भक्तों, पंडे और पुजारियों को रंग लेकर आने की अनुमति नहीं होगी। प्रवेश से पहले सभी की जांच अनिवार्य रहेगी।
उज्जैन महाकाल मंदिर में रंगपंचमी पर भस्म आरती में महाकाल को अर्पित होगा एक लोटा केसर जल, चेकिंग के बाद ही भक्तों को दिया जाएगा प्रवेश

रंगपंचमी के अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर में सबसे बड़ा बदलाव वही है, जो पिछले दो वर्षों से सुरक्षा कारणों के चलते लागू है—भस्म आरती में भगवान महाकाल को सीमित रूप से ही रंग अर्पित किया जाएगा। मंदिर प्रशासन ने तय किया है कि इस बार भी केवल एक लोटा केसर जल ही अर्पित होगा और परिसर में बाहरी रंग की एंट्री नहीं होगी।

तड़के 4 बजे शुरू हुई भस्म आरती के क्रम में पारंपरिक रूप से रंग अर्पण की प्रक्रिया रखी गई, लेकिन इसे नियंत्रित और निर्धारित स्वरूप में किया गया। मंदिर की ओर से बताया गया कि अर्पित रंग टेसू के फूलों से तैयार हर्बल स्वरूप में रहेगा, जबकि केसर जल की व्यवस्था भी मंदिर प्रशासनिक नियंत्रण में ही की जाएगी।

दो साल पुरानी आग की घटना के बाद सख्त व्यवस्था

मंदिर समिति ने यह व्यवस्था किसी औपचारिकता के तौर पर नहीं, बल्कि सीधे सुरक्षा जोखिम से जुड़ी पृष्ठभूमि में जारी रखी है। धुलेंडी के दिन गर्भगृह में लगी आग की घटना के बाद रंगपंचमी और होली से जुड़े अनुष्ठानों में नियम बदले गए थे। उसी के बाद से खुला रंग लाने, छिड़काव करने और अनियंत्रित सामग्री ले जाने पर रोक लागू की गई।

इस बार भी वही प्रोटोकॉल लागू है। भक्तों से स्पष्ट अनुरोध किया गया है कि वे मंदिर परिसर में रंग न लाएं। यह निर्देश केवल आम श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं है; पंडे और पुजारियों पर भी समान रूप से लागू है।

जांच के बाद ही प्रवेश, कोठार शाखा से रंग-जल उपलब्ध

मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रवेश व्यवस्था को विशेष रूप से कड़ा किया गया है। आरती के दौरान और उसके बाद आने वाले श्रद्धालुओं को जांच के बाद ही अंदर जाने दिया जाएगा। इससे अनधिकृत सामग्री के प्रवेश पर रोक सुनिश्चित की जा सके।

“सुबह भस्म आरती के दौरान भगवान को केसर जल अर्पित किया जाएगा। मंदिर आने वाले भक्तों को जांच के बाद ही प्रवेश दिया जाएगा, और सभी से परिसर में रंग नहीं लाने का अनुरोध है।” — प्रथम कौशिक, प्रशासक, महाकाल मंदिर समिति

समिति ने यह भी बताया कि रंग और जल की आपूर्ति बाहर से नहीं, बल्कि मंदिर की कोठार शाखा से की जाएगी। यही सामग्री पुजारी और शासकीय पुजारी को उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि अनुष्ठान की परंपरा भी बनी रहे और सुरक्षा मानकों से समझौता भी न हो।

रंगपंचमी पर महाकाल मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासनिक दृष्टि से यह व्यवस्था भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा—दोनों के लिए केंद्रीय भूमिका निभाती है। मंदिर समिति का फोकस इस बार भी साफ है: अनुष्ठान नियत विधि से हो, लेकिन जोखिम की कोई गुंजाइश न रहे।

Banshika Sharma
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कंटेंट राइटर

मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma →
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