उज्जैन का मौनतीर्थ पीठ एक बार फिर एक अनूठी धार्मिक घटना का साक्षी बना, जहां गांधी नगर निवासी एक युवक ने अपनी स्वेच्छा से सनातन धर्म को अपनाते हुए एक नई पहचान ग्रहण की। दरअसल गंगाघाट स्थित मौनतीर्थ आश्रम में आयोजित एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान के उपरांत, पूर्व में सलमान खान नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक को अब ‘शांतनु’ के नाम से जाना जाएगा और उन्हें कश्यप गोत्र प्रदान किया गया है। यह संपूर्ण प्रक्रिया रविवार को विधि-विधान के साथ संपन्न हुई।
जानकारी के अनुसार, युवक ने सनातन धर्म अपनाने की अपनी इच्छा को लेकर जिला दंडाधिकारी के समक्ष एक विधिवत आवेदन प्रस्तुत किया था। इस आवेदन में उन्होंने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था कि उनका यह निर्णय किसी भी प्रकार के दबाव, प्रलोभन अथवा जबरदस्ती के बिना, पूर्णतः उनकी व्यक्तिगत स्वेच्छा पर आधारित है। यह घोषणा उनके दृढ़ संकल्प को दर्शाती है।
बचपन से ही उनकी सनातन धर्म में आस्था रही
दरअसल शांतनु ने स्वयं बताया कि बचपन से ही उनकी सनातन धर्म की प्राचीन परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक मूल्यों में गहरी आस्था रही है। वे नियमित रूप से मंदिरों में दर्शन के लिए जाते रहे हैं और विभिन्न धार्मिक आयोजनों में भी सक्रिय रूप से शामिल होते रहे हैं। सनातन संस्कृति की व्यापकता और जीवन मूल्यों से प्रभावित होकर, वे लंबे समय से इस धर्म को अपने जीवन में अपनाने की प्रबल इच्छा रखते थे। उनकी यह आस्था ही इस परिवर्तन का मूल आधार बनी।
मौनतीर्थ आश्रम में डॉ. सुमनानंद गिरी महाराज के सान्निध्य में धर्म प्रवेश की यह धार्मिक प्रक्रिया पूर्ण कराई गई। इस अवसर पर शिप्रा नदी के पवित्र जल में दशविधि स्नान का अनुष्ठान किया गया, जिसके पश्चात् प्रायश्चित कर्म, पंचगव्य सेवन और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सभी आवश्यक संस्कार विधि-विधानपूर्वक संपन्न हुए। इन धार्मिक क्रियाओं ने शांतनु को सनातन धर्म में पूर्ण रूप से समाहित करने का मार्ग प्रशस्त किया।
मित्र को बताई थी इच्छा
शांतनु ने बताया कि उन्होंने अपनी इस इच्छा को सर्वप्रथम अपने मित्र पीयूष रघुवंशी के साथ साझा किया था। इसके बाद, कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से धर्म प्रवेश की यह पूरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न हो सकी। कार्यक्रम के दौरान कई स्थानीय कार्यकर्ता और श्रद्धालु भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस धार्मिक परिवर्तन के साक्षी बनकर इसे अपना समर्थन दिया।
युवक ने यह भी बताया कि उनके परिवार में माता-पिता और भाई-बहन हैं, किंतु इस महत्वपूर्ण निर्णय को लेकर उन्हें अपने परिवार का अपेक्षित समर्थन प्राप्त नहीं हुआ है। हालांकि, उन्हें धर्म प्रवेश की प्रक्रिया में सहयोग करने वाले लोगों का साथ और मार्गदर्शन लगातार मिल रहा है, जो उनके लिए एक बड़ा संबल है।
पेशे से एक कुशल कारीगर शांतनु ने आत्मविश्वास के साथ कहा कि उन्हें अपने हुनर और कार्यकुशलता पर पूर्ण भरोसा है। वे अपने कौशल के आधार पर सम्मानपूर्वक और आत्मनिर्भर जीवन-यापन करने में सक्षम हैं। यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि मौनतीर्थ आश्रम पूर्व में भी इसी प्रकार के धार्मिक दीक्षा और संस्कार कार्यक्रमों के आयोजन के कारण स्थानीय एवं क्षेत्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रहा है।






