उज्जैन में इस बार सावन माह भक्ति और आस्था के एक ऐसे दुर्लभ संगम का साक्षी बनने जा रहा है, जब भगवान महाकाल की नगरी में एक साथ दो बड़े धार्मिक आयोजनों का उल्लास छाएगा। दरअसल 17 अगस्त को सावन की तीसरी सवारी और नागपंचमी का पावन पर्व एक ही दिन पड़ रहा है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस शुभ अवसर पर साल में केवल एक बार खुलने वाले भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट भी भक्तों के दर्शनार्थ खोले जाएंगे। इन दोनों बड़े आयोजनों के एक साथ होने से महाकाल मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ने की संभावना है। इसे देखते हुए मंदिर प्रशासन ने विशेष तैयारियों का खाका खींचना शुरू कर दिया है।
दरअसल करीब सात साल बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जब सावन की तीसरी सवारी और नागपंचमी का पावन पर्व एक ही दिन आएगा। इससे पहले वर्ष 2019 में भी इसी तरह का अद्भुत संयोग बना था, जब बड़ी संख्या में भक्त महाकाल की सवारी के दर्शन और नागचंद्रेश्वर भगवान के आशीर्वाद के लिए उज्जैन पहुंचे थे। इस बार भी मंदिर प्रशासन 8 से 10 लाख श्रद्धालुओं के आगमन की उम्मीद कर रहा है, जिसके लिए व्यापक व्यवस्थाएं की जा रही हैं, ताकि हर भक्त सुगमता से दर्शन कर सके।
वर्ष में केवल एक बार खोले जाते हैं पट
भगवान महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट वर्ष में केवल एक बार नागपंचमी के दिन ही 24 घंटे के लिए खोले जाते हैं। इस एक दिन के लिए देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर के दर्शन करने उज्जैन पहुंचते हैं। इसी दिन सावन के तीसरे सोमवार की भगवान महाकाल की भव्य शाही सवारी भी निकलेगी, जिससे भक्तों की संख्या में और अधिक वृद्धि होने की प्रबल संभावना है। यह दिन उज्जैन में भक्ति, आस्था और सांस्कृतिक उत्सव का एक अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करेगा, जहां हर ओर जयकारों की गूंज सुनाई देगी।
उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जाएगी
महाकाल मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने इस अभूतपूर्व भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष योजना बनाने की बात कही है। दरअसल उन्होंने बताया कि तीसरी सवारी और नागपंचमी के एक ही दिन पड़ने के कारण दर्शन और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए एक अलग से उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक में पुलिस विभाग, जिला प्रशासन, और मंदिर समिति के वरिष्ठ अधिकारी एवं सदस्यगण शामिल होंगे। बैठक में श्रद्धालुओं के लिए सुगम दर्शन की व्यवस्था सुनिश्चित करने और उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों पर गहन विचार-विमर्श कर विशेष योजना बनाई जाएगी, ताकि कोई भी भक्त दर्शन से वंचित न रहे और व्यवस्था सुचारु रूप से चले।
प्रतिमा 11वीं शताब्दी की मानी जाती है
वहीं सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी का पावन पर्व बड़े ही श्रद्धाभाव से मनाया जाता है। इसी दिन भक्तों को नागचंद्रेश्वर मंदिर में स्थापित दुर्लभ प्रतिमा के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है। यह प्रतिमा 11वीं शताब्दी की मानी जाती है और इसकी विशिष्टता यह है कि इसमें फन फैलाए हुए नाग पर भगवान शिव और माता पार्वती विराजमान हैं। यह विश्व में अपनी तरह की एक अत्यंत दुर्लभ प्रतिमा मानी जाती है और वर्षभर में केवल इस एक विशेष दिन ही श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए उपलब्ध रहती है, जो इसे और भी महत्वपूर्ण बनाता है। इस प्रतिमा के दर्शन से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।






