बैगा आदिवासी बुजुर्ग की अफसरों से गुहार…साहब मुझे जिन्दा कर दो मुझे योजनाओं का लाभ चाहिए….

80 वर्षीय आदिवासी बुजुर्ग एक बार फिर हाथ में आवेदन लेकर पहुंचा और बोला कि साहब अब मरने वाला हूं अब तो मुझे जिन्दा कर दो। मेरे पंचायत के लोग मुझे मार डाले हैं और अब मै बेसहारा हो गया हूं, खाने तक के लाले पड़े हुए हैं।
Umaria Tribal News

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देश भर में विलुप्त हो रही बैगा जनजाति के लिए करोड़ों रुपए की योजनाएं बनाकर उन्हें लाभांवित करने प्रयासरत हैं पर जब आदमी को ही मार डाला जाये तो वह लाभ कैसे लेगा, जिले में लगातार पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं, कभी जिन्दा व्यक्ति अपने को मरा बता रहा है तो कहीं मृतकों को आवास योजना का लाभ दिया जा रहा है, ऐसा ही एक मामला उमरिया  जिला प्रशासन के सामने आया जिसने गुहार लगाकर अधिकारियों से कहा कि साहब मुझे जिन्दा कर दो जिससे मुझे योजनाओं का लाभ मिलने लगे।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देशों के बावजूद कुछ सरकारी अफसरों की गलतियों का खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ता है, यहाँ मामला तो आदिवासी वो भी विलुप्त होती जा रही बैगा आदिवासी समुदाय का है, सरकारी रिकॉर्ड में एक बुजुर्ग को 12 साल पहले मार डाला तब से वो लगातार हर अधिकारी की चौखट पर जाकर एक ही गुहर लगा रहा है साहब मुझे जिन्दा कर दो।

12 साल पहले सरकारी रिकॉर्ड में मार दिया आदिवासी को  

मामला उमरिया जिले की करकेली जनपद के सहजनारा ग्राम पंचायत का है जहां के रहवासी घमीरा बैगा पिछले 12 साल पहले मर चुके हैं, इन्हें किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है, जिसके कारण यह सैकड़ों बार जिला कलेक्टर की चौखट का दरवाजा खटखटा चुके हैं पर समाधान शून्य ही रहा है।

जनसुनवाई में बोला बुजुर्ग मरने वाला हूं अब तो मुझे जिन्दा कर दो

मंगलवार को जनसुनवाई में 80 वर्षीय आदिवासी बुजुर्ग एक बार फिर हाथ में आवेदन लेकर पहुंचा और दहाड़ मार बोला कि साहब अब मरने वाला हूं अब तो मुझे जिन्दा कर दो, मेरे पंचायत के लोग मुझे मार डाले हैं और अब मै बेसहारा हो गया हूं, खाने तक के लाले पड़े हुए हैं। बहरहाल जो भी हो जिले भर में यह कोई पहली कहानी नहीं है ऐसा घटनाक्रम होता रहता है और जिला प्रशासन के कानों में जूं तक नहीं रेंगती।

जिला प्रशासन ने जल्द निराकरण का दिया भरोसा 

जिला पंचायत सीईओ अभय सिंह ओहरी ने कहा कि हम शासन की सभी योजनाओं का लाभ जनता को देते हैं आदिवासियों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ भी पंचायतों के माध्यम से दिया जा रहा है उन्होंने कहा घमीरा आदिवासी का नाम कैसे कट गया उसे कैसे मृत घोषित किया गया ये जाँच के बाद ही मालूम चल सकेगा, जल्दी ही इस समस्या का समाधान करेंगे।

ब्रजेश श्रीवास्तव की रिपोर्ट 

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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