बांधवगढ़ में गौर पुनर्स्थापना: दूसरे चरण में सतपुड़ा से 5 जानवर पहुंचे, विशेष बाड़े में किए गए शिफ्ट

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गौर पुनर्स्थापना कार्यक्रम के दूसरे चरण में सतपुड़ा से 5 गौर लाए गए हैं। एक नर और चार मादा गौर को कल्लवाह परिक्षेत्र के विशेष बाड़े में छोड़ा गया है, जहां विशेषज्ञ एक महीने तक उनकी निगरानी करेंगे। इस कार्यक्रम का लक्ष्य क्षेत्र में विलुप्त हो चुकी गौर की आबादी को फिर से बसाना है।
Bandhavgarh Tiger Reserve Gaur

Bandhavgarh Tiger Reserve Gaur

उमरिया: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। गौर पुनर्स्थापना कार्यक्रम के तहत सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से लाए गए पांच और गौर को सफलतापूर्वक बांधवगढ़ में स्थानांतरित कर दिया गया है। इनमें एक नर और चार मादा गौर शामिल हैं, जिन्हें कल्लवाह परिक्षेत्र में बने 20 हेक्टेयर के विशेष बाड़े में छोड़ा गया है।

यह प्रयास बांधवगढ़ के जंगलों में दशकों पहले विलुप्त हो चुकी गौर की आबादी को फिर से बसाने के लिए किया जा रहा है। विशेषज्ञों की एक टीम इन गौरों पर लगातार नजर रखेगी, ताकि वे नए वातावरण में सुरक्षित रूप से खुद को ढाल सकें।

दूसरे चरण में 5 गौर स्थानांतरित

टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के अनुसार, यह पुनर्स्थापना कार्यक्रम का दूसरा चरण है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत कुल 50 गौरों को चरणबद्ध तरीके से बांधवगढ़ लाने की योजना है। इससे पहले पहले चरण में 22 गौरों को यहां सफलतापूर्वक बसाया जा चुका है। अब पांच नए गौर आने के बाद इनकी कुल संख्या 27 हो गई है।

एक महीने तक विशेष बाड़े में निगरानी

सतपुड़ा से लाए गए इन सभी गौरों को एक महीने तक विशेष बाड़े में रखा जाएगा। फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय ने बताया कि इस अवधि के दौरान विशेषज्ञ उनके स्वास्थ्य, व्यवहार और नए माहौल के साथ उनके अनुकूलन की प्रक्रिया पर कड़ी नजर रखेंगे। बाड़े में पूरी तरह से अभ्यस्त हो जाने और स्वास्थ्य जांच पूरी होने के बाद ही उन्हें जंगल में छोड़ा जाएगा।

पारिस्थितिक संतुलन के लिए अहम

यह पूरा कार्यक्रम भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और मध्य प्रदेश वन विभाग के संयुक्त प्रयासों से चलाया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि गौर जैसे बड़े शाकाहारी जानवरों की वापसी से जंगल के पारिस्थितिक संतुलन को मजबूती मिलेगी। इससे न केवल घास के मैदानों का प्रबंधन बेहतर होगा, बल्कि बाघ जैसे मांसाहारी जीवों के लिए शिकार का एक प्राकृतिक आधार भी मजबूत होगा। आने वाले समय में और गौरों को लाकर इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जाएगा।

Banshika Sharma
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कंटेंट राइटर

मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma →
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