किसानों को बांटने खरीदी गई दवाएं स्टोर में हो गई एक्सपायर, खुलासा हुआ तो नदी नालों में फेंक दी, अब कर रहे जाँच की बात

आरोप है कि किसानों के नाम पर खरीदी गई दवाइयों का न तो सही वितरण हुआ और न ही जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते इसकी जानकारी प्रशासन को दी। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसानों के नाम पर हुई लाखों की खरीद का जिम्मेदार कौन है?
Medicines purchased for distribution to farmers expire in the store, Umaria

Medicines purchased for distribution to farmers expire in the store, Umaria

“किसान हितैषी योजनाओं” के बड़े-बड़े दावों के बीच उमरिया जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों को मुफ्त वितरण के लिए खरीदी गई लाखों रुपये की कीटनाशक और रासायनिक दवाइयां स्टोर में बंद पड़ी-पड़ी एक्सपायर हो गईं। इतना ही नहीं, जब मामले की भनक लोगों और मीडिया तक पहुंची तो विभाग ने कथित तौर पर एक्सपायरी दवाइयों को नदी-नालों में फिंकवा दिया। कैमरे में मजदूर बोरी भर-भरकर दवाइयां ले जाते दिखाई दिए, जिसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है।

पूरा मामला उमरिया जिले के उद्यानिकी विभाग से जुड़ा हुआ है। जानकारी के मुताबिक वर्ष 2024-25 में जिले के किसानों को वितरण के लिए लाखों रुपये की कीटनाशक और उपयोगी रासायनिक दवाइयों की खरीदी की गई थी। उद्देश्य था कि किसानों को समय पर दवाइयां मिलें और उनकी फसल सुरक्षित रहे। लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते ये दवाइयां किसानों तक पहुंच ही नहीं सकीं।

कमरों में रखे रखे एक्सपायर हो गई कीटनाशक दवाएं 

बताया जा रहा है कि खरीदी गई दवाइयों को विभाग के कमरों और गोदामों में बंद कर दिया गया। समय बीतता गया और दवाइयां एक्सपायरी डेट पार कर गईं। हैरानी की बात यह है कि जिले के कई किसान आज भी इन दवाइयों के इंतजार में हैं, जबकि दूसरी ओर विभाग एक्सपायर दवाइयों को ठिकाने लगाने में जुटा रहा।

एक्सपायर हो चुकी दवाइयों को नदी-नालों में फेंकने के आरोप 

मामले ने तब गंभीर रूप लिया जब कुछ वीडियो सामने आए, जिनमें मजदूर बोरी में दवाइयां भरते नजर आए। आरोप है कि एक्सपायर हो चुकी दवाइयों को नदी-नालों में फेंका गया, ताकि पूरे मामले को दबाया जा सके। वीडियो सामने आने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

कांग्रेस ने अधिकारियों की कार्य प्रणाली को कठघरे में खड़ा किया  

कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय सिंह ने इस पूरे मामले को किसानों के साथ बड़ा धोखा बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग ने लाखों रुपये की दवाइयां खरीदीं, लेकिन उन्हें किसानों तक पहुंचाने की बजाय गोदामों में सड़ने के लिए छोड़ दिया। उन्होंने यह भी कहा कि विभागीय अधिकारियों ने पहले जिला कलेक्टर को गुमराह किया और बाद में मीडिया के सामने जांच का आश्वासन देकर मामले को शांत करने की कोशिश की।

आला अधिकारी कर रहे जाँच की बात, कई सव्लों के जवाब नहीं उनके पास  

वहीं उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक झनक सिंह मरावी का कहना है कि मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर कार्रवाई होगी। हालांकि विभाग के इस जवाब से कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर किसानों के नाम पर खरीदी गई लाखों रुपये की दवाइयां गोदामों में क्यों पड़ी रहीं? यदि दवाइयां वितरण के लिए थीं तो किसानों तक पहुंचीं क्यों नहीं? और यदि दवाइयां एक्सपायर हो चुकी थीं तो उन्हें नियमानुसार नष्ट करने की बजाय कथित तौर पर नदी-नालों में क्यों फेंका गया?

राजस्व के नुकसान और किसानों की परेशानी के लिए जिम्मेदार कौन 

आरोप है कि किसानों के नाम पर खरीदी गई दवाइयों का न तो सही वितरण हुआ और न ही जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते इसकी जानकारी प्रशासन को दी। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसानों के नाम पर हुई लाखों की खरीद का जिम्मेदार कौन है? अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी निष्पक्ष जांच करता है और किसानों के हक पर डाका डालने वालों पर क्या कार्रवाई होती है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
Atul Saxena

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
Follow Us :GoogleNews