मध्य प्रदेश के उमरिया जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 9 लाख रुपये की ठगी की गई। हैरानी की बात यह है कि आरोपियों के सामने होने के बावजूद पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और पीड़ितों को यह कहकर टाल दिया कि मामला उत्तर प्रदेश का है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश के दो युवकों को एक युवक ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में नौकरी दिलाने का झांसा दिया। आरोप है कि आरोपी ने दोनों से करीब 9 लाख रुपये वसूले और उन्हें फर्जी ज्वाइनिंग लेटर देकर उमरिया बुला लिया। इतना ही नहीं, भरोसा दिलाने के लिए दोनों युवकों को एक महीने तक कथित “प्रशिक्षण” भी कराया गया।
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मामला तब उजागर हुआ जब आरोपीयों की जानकारी मकान मालिक ने पुलिस को सूचना दी यह किराएदार मुझे वन विभाग में नौकरी के नाम पर कमरा किराए पर लिया है ना तो यह कभी ड्यूटी जाते हैं ना ही यह वर्दी में रहते हैं। मौके पर पहुंची पुलिस ने पूछताछ तो की, लेकिन न तो आरोपी को हिरासत में लिया और न ही तत्काल कोई ठोस कार्रवाई की।
पुलिस की कार्यवाही पर पीड़ितों ने उठाये सवाल
वही पीड़ितों का आरोप है कि जब उन्होंने पुलिस से मदद मांगी तो उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया गया कि वे उत्तर प्रदेश के निवासी हैं, इसलिए अपने राज्य में जाकर शिकायत करें। इस रवैये से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बांधवगढ़ प्रबंधन ने दस्तावेज फर्जी बताये
जब इस पूरे मामले की जानकारी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन को लगी, तो उन्होंने साफ तौर पर सभी दस्तावेजों को फर्जी बताया। प्रबंधन का कहना है कि इस तरह की कोई भर्ती प्रक्रिया नहीं हुई है और यह पूरी तरह ठगी का मामला है। उन्होंने पुलिस को धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर सख्त कार्रवाई करने की सलाह भी दी है। आरोपी खुद को करकेली के वन विभाग कार्यालय में कार्यरत बताता था, जिससे पीड़ितों को उस पर भरोसा हो गया। लेकिन अब आरोपी फरार बताया जा रहा है और पीड़ित दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ठगी का मामला स्पष्ट है, तो आखिर पुलिस कार्रवाई से क्यों बच रही है? क्या जिम्मेदारी से बचना ही अब नई व्यवस्था बनती जा रही है? फिलहाल पीड़ितों को न्याय का इंतजार है।