उमरिया: आदिवासी छात्रावास की बदहाली पर उठे सवाल, प्रभारी मंत्री ने दिए जांच के आदेश

कई छात्रों का कहना है कि भोजन की गुणवत्ता भी बेहद खराब है, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं छात्रावास के सोने के लिए बिस्तर तक नहीं है छात्र अपने घरों से लाए हुए बिस्तर पर सोते हैं फटे गंदे देखने को मिले।
poor condition tribal boys hostel Umaria

poor condition tribal boys hostel Umaria

मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के आदिवासी बाहुल्य पाली ब्लॉक के ग्राम चौरी में स्थित आदिवासी छात्रावास की स्थिति इन दिनों बेहद खराब स्थिति में है। छात्रावास में रह रहे छात्रों को भोजन, स्वच्छता और सोने की व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। हालात इतने खराब हैं यहां तक की वहां पर कार्यरत श्रमिकों को भी 6 से 7 माह से वेतन नहीं मिला है।

छात्रावास में रहने वाले छात्रों को समय पर और पर्याप्त भोजन नहीं मिल रहा है। कई छात्रों का कहना है कि भोजन की गुणवत्ता भी बेहद खराब है, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं छात्रावास के सोने के लिए बिस्तर तक नहीं है छात्र अपने घरों से लाए हुए बिस्तर पर सोते हैं फटे गंदे देखने को मिले। कई कमरों में साफ-सफाई का अभाव है जिसके कारण छात्रों को ठीक से सोने में भी दिक्कतो का सामना करना पड़ता है।

मूलभूत सुविधाओं की लगातार अनदेखी के आरोप 

छात्रों का यह भी आरोप है कि छात्रावास में मूलभूत सुविधाओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। पेयजल, शौचालय और साफ-सफाई की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। इन समस्याओं के कारण छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।

प्रभारी मंत्री ने दिए जाँच के आदेश 

मामले की जानकारी जब जिले के प्रभारी मंत्री नागर‌ सिह चौहान तक पहुंची तो उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर को छात्रावास की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।  मंत्री ने कहा है कि छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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