उमरिया जिले के घुलघुली स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के कंचन ओपन कोल माइंस परियोजना के अधिग्रहण क्षेत्र में आने के बाद 613 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई और सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। एक ओर अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, वहीं दूसरी ओर विद्यालय के आसपास होने वाली भारी ब्लास्टिंग और खनन गतिविधियों से विद्यार्थियों में भी भय का माहौल बना हुआ है।
ग्रामीणों द्वारा लगातार शिकायत किए जाने के बाद उमरिया कलेक्टर ने जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों, शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कंचन ओपन कोल माइंस प्रबंधन की संयुक्त बैठक आयोजित की। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित न हो और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। इसके तहत माइंस प्रबंधन विद्यार्थियों के सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करेगा। साथ ही शिक्षा विभाग ने कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों को प्राथमिक शाला नरवार-29 तथा कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जरहा में अस्थायी रूप से स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है।
हालांकि इस निर्णय के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार कंचन ओपन कोल माइंस प्रबंधन द्वारा विद्यालय के अधिग्रहण के एवज में शिक्षा विभाग को मुआवजे की राशि पहले ही उपलब्ध करा दी गई थी। इसके बावजूद विभाग ने अब तक न तो नए विद्यालय भवन के निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल की और न ही नए स्थान का चयन किया। यदि समय रहते नई व्यवस्था कर ली जाती, तो आज सैकड़ों विद्यार्थियों को अस्थायी व्यवस्था के भरोसे अपनी पढ़ाई जारी रखने की नौबत नहीं आती।
दो अलग अलग स्कूलों की बच्चों की शिफ्टिंग
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि घुलघुली विद्यालय के 613 विद्यार्थियों का प्रवेश जब नरवार-29 प्राथमिक विद्यालय और जरहा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में होगा, तब वहां पहले सेअध्ययनरत विद्यार्थियों की पढ़ाई पर क्या प्रभाव पड़ेगा। सीमित संसाधनों, कक्षाओं और शिक्षकों वाले इन विद्यालयों पर अचानक अतिरिक्त विद्यार्थियों का बोझ बढ़ने से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
परिजनों को बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई की चिंता
स्थानीय लोगों और परिजनों का कहना है कि यदि शिक्षा विभाग ने समय पर योजना बनाकर नया विद्यालय भवन तैयार कराया होता तो आज विद्यार्थियों के भविष्य के साथ इस तरह का जोखिम नहीं उठाना पड़ता। परिजन बच्चों की पढ़ाई और उनकी सुरक्षा को लेकर अधिक चिंतित हैं, उनका कहना है कि 8 -10 किलोमीटर दूर बचा जायेगा तो घर लौटकर कब होम वर्क करेगा कब खेलेगा, इसकी भी चिंता प्रशासन को करना चाहिए।
स्थाई समाधान कब तक, जवाब किसी के पास नहीं
फिलहाल अस्थायी व्यवस्था तो कर दी गई है, लेकिन स्थायी समाधान कब तक मिलेगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। अब निगाहें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग पर टिकी हैं कि वे विद्यार्थियों के लिए शीघ्र स्थायी एवं सुरक्षित विद्यालय की व्यवस्था कर उनकी शिक्षा और भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में ठोस कदम कब उठाते हैं।






