उमरिया जिले के घुनघुटी-पत्नार क्षेत्र में प्रस्तावित बजरंग पावर परियोजना को लेकर आयोजित पर्यावरण जनसुनवाई विवादों में घिर गई है। भारतीय किसान संघ और ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने जनसुनवाई से पहले ग्रामीणों को विभिन्न प्रलोभन देकर अपने पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया।
किसान संघ का दावा है कि जनसुनवाई के कुछ दिन पहले से ही कंपनी प्रबंधन क्षेत्र में सक्रिय था और लोगों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी। वहीं जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने प्रदूषण, जल संकट, खेती पर प्रभाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।
विवाद उस समय और गहरा गया जब भारतीय किसान संघ ने आरोप लगाया कि जनसुनवाई समाप्त होने के बाद कुछ अधिकारी शहडोल स्थित एक होटल में कंपनी द्वारा आयोजित भोजन कार्यक्रम में शामिल हुए। उपहार दिए जाने की चर्चाओं ने भी पूरे मामले को चर्चा का विषय बना दिया है। संघ कहना है कि जिस कंपनी के खिलाफ ग्रामीण अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हों, उसी कंपनी के आतिथ्य को स्वीकार करना निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है।
भारतीय किसान संघ ने उठाये सवाल
भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि यदि जनसुनवाई निष्पक्ष थी तो फिर लोगों को प्रभावित करने और बाद में अधिकारियों की मेहमाननवाजी की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग की है।
जिम्मेदारों ने सवालों से कन्नी काटी
मामले में कंपनी का पक्ष जानने के लिए बजरंग पावर के मैनेजर जे.पी. द्विवेदी से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर कहा “क्या आप सामने थे?” कहकर फोन काट दिया। वहीं क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी अशोक तिवारी से भी संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
कमिश्नर कार्यालय के घेराव की चेतावनी
जिला पंचायत सदस्य हेमनाथ बेगाने ने कंपनी से अपने सभी वादे लिखित रूप में सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ग्रामीणों की चिंताओं को नजरअंदाज किया गया तो आंदोलन किया जाएगा। इस बीच भारतीय किसान संघ ने शहडोल स्थित कमिश्नरी कार्यालय के घेराव की घोषणा की है। संघ का कहना है कि जनसुनवाई से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।






