प्रदेश सरकार के बड़े अफसर अपने ऑफिस में ए सी में रहते हैं फिरज का ठंडा पानी पीते हैं लेकिन वे अपनी जिम्मेदारियां भूल जाते हैं कि वे क्यों उस कुर्सी पर बैठे हैं, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देशों का कितना पालन फील्ड में अफसर करते हैं इसलिए एक बानगी उमरिया जिले आदिवासी बाहुल्य गांव माली में देखने को मिली जब तेज धूप में सिर पर घड़े रखे बच्चे और महिलाएं पानी के जद्दोजहद करते दिखाई दिए
पूरे देश में डीजल-पेट्रोल के बढ़ते दाम सुर्खियों में हैं, उसकी चर्चा है , कॉकरोच जनता पार्टी की चर्चा है, सियासतदान आरोप प्रत्यारोप में व्यस्त है लेकिन माली गांव के आदिवासियों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता उन्हें फर्क तब पड़ता है जब वे पानी के 3 किलोमीटर दूर घाट उतर कर जाते हैं फिर वापस आते हैं तब उनकी दिनचर्या शुरू होती है, बूंद बूंद पानी उनके जीवन का संघर्ष बन गया है, भीषण गर्मी भी उनको कुछ बिगाड़ नहीं पाती।
3 किलोमीटर दूर कुआं, घाट भी चढ़ना उतरना पड़ता है
माली गांव की निवासी इन्द्राणी बाई बताती हैं कि हमारे गांव में एक ही कुआँ है। घाट को चढ़कर हम पानी भरते हैं। उम्र दराज होने से 3 किलोमीटर जाने आने में हमें काफी समस्या होती है। वो कहती हैं पानी देने का वादा जिला प्रशासन करता तो है लेकिन हमें पानी नही मिलता। हमें बड़ी मजबूरी में घाट चढ़कर पानी लाना पड़ता है। गनेसिया बाई बताती है कि पानी की बहुत समस्या है। गांव के सभी लोग इस एक ही कुएं पर आते हैं तो यहां से पानी ले जाते हैं। यहाँ भी एक-दो घंटे लाइन लगना पड़ता है तब पानी मिलता है।
पेयजल ही नहीं नहाने के पानी के लिए भी परेशान है आदिवासी
माली गांव की इमरती बाई बताती हैं कि हमें पीने के पानी के साथ-साथ रोज के नहाने के लिए भी पानी की बड़ी समस्या है। गांव से 2 किलोमीटर दूर एक तालाब है जहां हम नहाने जाते है उसके बाद घर से 2-3 किलोमीटर दूर इस कुएँ में पीने का पानी लेने आते है। हमें पानी चाहिए क्योंकि हमारे छोटे-छोटे बच्चे भी पानी दिनभर भरते है। गांव के ही सुंदर सिंह बताते है कि हमारे गांव मे पानी की जटिल समस्या है। हमारे गाँव मे नहाने के लिए तालाब का गंदा पानी है। पीने के लिए भी 2-3 किलोमीटर घाट चढ़कर बच्चे,बूढे दिनभर पानी भरते है। हम जिला प्रशासन से अनुरोध करते है कि हमे पानी उपलब्ध करवाया जाए। हमारे गाँव मे नलजल योजना भी बंद पड़ी हुई है।
कलेक्टर मीडिया से बोलीं मुझे आपसे जानकारी मिली है
जब इस पूरे मामले में जिला कलेक्टर उमरिया राखी सहाय से बातचीत की गई तो उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं थी, उन्होंने कहा आपके द्वारा संज्ञान में लाया गया कि माली गांव में पेयजल संकट हैं। मैंने अभी तुरन्त एसडीएम बांधवगढ़ और राजस्व के अमले को तस्दीक करने के लिए कहा है। यदि पेयजल की समस्या है तो अभी टैंकर के माध्यम से पानी उपलब्ध करवाया जाएगा।






