उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष प्रेम चंद कश्यप और पूर्व राज्यमंत्री अच्छे लाल निषाद ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ सुभासपा का दामन छोड़ दिया। इन दोनों महत्वपूर्ण नेताओं ने विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) में अपनी जगह बनाई। यह घटनाक्रम प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर गया है, खासकर छोटे दलों के बीच गठबंधन और दल-बदल की संभावनाओं को देखते हुए।
वीआईपी के अध्यक्ष मुकेश सहनी ने स्वयं दोनों नेताओं और उनके समर्थक दल को पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस राजनीतिक फेरबदल के तुरंत बाद सुभासपा अध्यक्ष और पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने भी प्रेमचंद कश्यप के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। राजभर ने एक पत्र जारी करते हुए कश्यप पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने का आरोप लगाया और उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। राजभर का स्पष्ट संदेश रहा कि पार्टी में किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रेमचंद कश्यप ने ओम प्रकाश राजभर पर साधा निशाना
वीआईपी की सदस्यता ग्रहण करने के बाद प्रेमचंद कश्यप ने अपने पूर्व अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर पर सीधा निशाना साधा। कश्यप ने कहा कि वह पिछड़ों, दलितों और वंचितों की लड़ाई लड़ने के उद्देश्य से सुभासपा से जुड़े थे, लेकिन पार्टी नेतृत्व अपने मूल संकल्प और उद्देश्य पर खरा नहीं उतर सका। उनका यह बयान सुभासपा की आंतरिक नीतियों पर गंभीर सवाल उठाता है। वहीं, पूर्व राज्यमंत्री अच्छे लाल निषाद ने भी दल-बदल के अपने निर्णय पर प्रकाश डाला। निषाद ने बताया कि वह विकासशील इंसान पार्टी की नीतियों और उसके द्वारा लड़ी जा रही सामाजिक न्याय की लड़ाई से प्रभावित हुए हैं, जिसके चलते उन्होंने वीआईपी में शामिल होने का फैसला किया।
मुकेश सहनी का निषाद पार्टी और भाजपा पर हमला
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच वीआईपी अध्यक्ष मुकेश सहनी ने भी मुखर होकर अपनी बात रखी। उन्होंने निषाद पार्टी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों पर हमला बोला। सहनी ने एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि समाज अब किसी ‘लोडर’ के साथ नहीं, बल्कि ‘लीडर’ के साथ रहेगा। उनका यह तीखा बयान निषाद समाज की राजनीति में संजय निषाद पर सीधा निशाना था। मुकेश सहनी ने संजय निषाद पर आरोप लगाया कि वह निषाद समाज के अधिकारों की लड़ाई लड़ने के बजाय भाजपा को मजबूत करने और अपने परिवार को राजनीतिक रूप से स्थापित करने में लगे हुए हैं।
मुकेश सहनी ने भाजपा के प्रति अपनी शर्तों को भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा निषाद समाज को आरक्षण प्रदान करती है, तो वह उसके साथ खड़े होंगे। अन्यथा, निषाद समाज अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगा। सहनी ने भाजपा पर संविधान की भावना के अनुरूप कार्य न करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि भगवा पार्टी सिर्फ सत्ता में बने रहने की राजनीति कर रही है, और संवैधानिक मूल्यों की अनदेखी कर रही है।
मालूम हो कि मुकेश सहनी इन दिनों उत्तर प्रदेश में अपने संगठन विस्तार अभियान में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले समय में उनके इस अभियान का असर प्रदेश की राजनीति में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। उधर, सुभासपा की ओर से जारी पत्र में प्रेमचंद कश्यप के निष्कासन का कारण विस्तार से बताया गया है। पत्र में उल्लेख है कि बीते कुछ दिनों से कश्यप के संबंध में लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। इन शिकायतों की गहन जांच-पड़ताल के बाद ही उन्हें पार्टी से निष्कासित करने का यह कठोर निर्णय लिया गया है। पार्टी अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने एक बार फिर दोहराया कि संगठन में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या पार्टी विरोधी गतिविधि स्वीकार्य नहीं होगी। यह घटना आगामी विधानसभा चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीतिक बिसात पर एक महत्वपूर्ण चाल मानी जा रही है।





