Hindi News

“अब आ गया सही समय राहुल गांधी अपने नाम से हटा दें ‘गांधी’..” आचार्य प्रमोद कृष्णम का बड़ा बयान

Written by:Gaurav Sharma
Published:
कांग्रेस के पूर्व नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अब उन्हें अपने नाम से 'गांधी' हटा देना चाहिए।
“अब आ गया सही समय राहुल गांधी अपने नाम से हटा दें ‘गांधी’..” आचार्य प्रमोद कृष्णम का बड़ा बयान

गाजियाबाद से कांग्रेस के पूर्व नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने राहुल गांधी पर एक बड़ा और सीधा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब राहुल गांधी के लिए यह बिल्कुल सही समय आ गया है कि वे अपने नाम से ‘गांधी’ हटा दें। इस तीखे बयान के पीछे आचार्य कृष्णम ने तर्क दिया कि राहुल गांधी के व्यक्तित्व या कार्यशैली में महात्मा गांधी के चरित्र की कोई भी झलक दूर-दूर तक दिखाई नहीं देती है। यह एक गंभीर आरोप है जो राहुल गांधी की राजनीतिक पहचान पर सीधे प्रश्नचिन्ह लगाता है और उनके नेतृत्व पर सवाल खड़े करता है।

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि सिर्फ वे ही नहीं, बल्कि पूरा विपक्ष भी इस बात को भली-भांति जानता है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराना असंभव सा प्रतीत होता है। यह विपक्ष की आंतरिक समझ है, जिसे कृष्णम ने सार्वजनिक रूप से उजागर किया। उनके अनुसार, राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर स्वयं उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भी भरोसा नहीं करते, जिससे भाजपा के खिलाफ एक मजबूत और प्रभावी मोर्चा बनाने की संभावना क्षीण हो जाती है। यह स्थिति कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिसे स्वीकार करना आवश्यक है।

जनता ने राहुल गांधी को ‘गांधी’ के रूप में कभी स्वीकार नहीं किया: आचार्य कृष्णम

गाजियाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए आचार्य कृष्णम ने कांग्रेस पार्टी की वर्तमान स्थिति पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सभी वरिष्ठ और कनिष्ठ नेता इस सच्चाई से भली-भांति अवगत हैं कि वे अब और अधिक मुकाबला नहीं कर सकते हैं। वे लगातार एक-एक करके हार का सामना कर रहे हैं, जिससे पार्टी का मनोबल गिरता जा रहा है और उसकी राजनीतिक जमीन कमजोर पड़ रही है। आचार्य कृष्णम ने यह भी दावा किया कि देश की आम जनता ने भी राहुल गांधी को ‘गांधी’ के रूप में कभी स्वीकार नहीं किया है। यह एक कटु सत्य है जिसे कांग्रेस को आत्मनिरीक्षण करते हुए स्वीकार करना चाहिए, क्योंकि जनता के मन में महात्मा गांधी की छवि और राहुल गांधी की वर्तमान राजनीतिक छवि में भारी अंतर है।

प्रमोद कृष्णम ने राहुल गांधी की राजनीतिक क्षमताओं पर उठाए सवाल

अपनी आलोचना को और तीखा करते हुए, प्रमोद कृष्णम ने राहुल गांधी की राजनीतिक क्षमताओं पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने भविष्यवाणी की कि राहुल गांधी की नाकाम क्षमता के कारण पूरा विपक्ष उन्हें ‘नेता प्रतिपक्ष’ के पद से हटा देगा। आचार्य कृष्णम ने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य की तुलना करते हुए कहा कि जहां नरेंद्र मोदी जैसा एक मजबूत और शक्तिशाली नेता सत्ता के शीर्ष पर बैठा हो, ऐसे में नेता प्रतिपक्ष का व्यवहार एक जोकर की तरह प्रतीत होता है। यह बयान राहुल गांधी की भूमिका और प्रभावशीलता पर सीधा हमला है, जो उनकी नेतृत्व शैली को हास्यास्पद बताता है और उनकी राजनीतिक गंभीरता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।

आचार्य प्रमोद कृष्णम स्वयं एक आध्यात्मिक गुरु के साथ-साथ भारतीय राजनीति का एक जाना-पहचाना और चर्चित चेहरा रहे हैं। उनका विशेष जुड़ाव लंबे समय तक कांग्रेस पार्टी के साथ रहा, जिसके कारण वे राजनीतिक गलियारों में लगातार सुर्खियों में बने रहते थे। वे संभल के प्रसिद्ध कल्कि धाम से जुड़े हुए हैं और विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बेबाक और खरी राय रखने के लिए भी जाने जाते हैं। वर्ष 2024 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी से अपनी दूरी बना ली थी और खुलकर पार्टी नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी की नीति और उनकी राजनीतिक रणनीति पर प्रश्नचिन्ह लगाए थे। उनके ये बयान कांग्रेस के लिए एक और अंदरूनी चुनौती पेश करते हैं और पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष को उजागर करते हैं।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma
Follow Us :GoogleNews