मथुरा की सड़कों पर फैला भयंकर जाम अब लोगों की जान का दुश्मन बन बैठा है। दरअसल यातायात व्यवस्था की बदहाली का ऐसा ही एक भयंकर चेहरा तब सामने आया, जब एक एम्बुलेंस सड़क पर आधे घंटे तक फंसी रही और पूर्व पार्षद के बेटे को समय पर इलाज न मिलने के कारण उसकी मौत हो गई। यह घटना मथुरा की ट्रैफिक व्यवस्था पर एक बार फिर सवालिया निशान खड़े कर रही है। परिजन अब सीधे तौर पर प्रशासन की इस लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं।
मथुरा में ट्रैफिक व्यवस्था इस कदर बिगड़ चुकी है कि यहां हर गली, हर चौराहे पर जाम ही जाम दिखाई देता है। आलम यह है कि यातायात पुलिसकर्मी अक्सर खानापूर्ति करते हुए ही नजर आते हैं, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। बीते 30 अप्रैल को सामने आया यह मामला इसी बदहाली का जीता-जागता उदाहरण है, जहां समय पर अस्पताल न पहुंच पाने के कारण एक व्यक्ति की जान चली गई। मृतक के परिजनों का आरोप है कि यदि सड़कों पर इस तरह जाम का बोलबाला नहीं होता तो आज उनके घर का चिराग कभी नहीं बुझता। उन्होंने मथुरा की ट्रैफिक व्यवस्था पर बड़े और गंभीर सवाल उठाए हैं, जिनकी गूंज अब दूर-दूर तक सुनाई दे रही है।
जानिए क्या है पूरा मामला?
दरअसल यह पूरा हृदय विदारक मामला मथुरा के थाना कोतवाली इलाके के चौबिया पाढा स्थित महोली की पोर निवासी पूर्व पार्षद के बेटे से जुड़ा है। 30 अप्रैल की शाम को यह युवक अपने कूलर में कुछ काम कर रहा था। अचानक कूलर में करंट आने से उसकी तबीयत बिगड़ गई और हालत गंभीर हो गई। बिना देर किए उसे तुरंत इलाज के लिए एम्बुलेंस से हाईवे इलाके में स्थित अस्पताल ले जाया जा रहा था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। मथुरा से मसानी लिंक रोड पर लगा भयंकर जाम उनके रास्ते का रोड़ा बन गया। एम्बुलेंस इस कदर जाम में फंसी कि उसे आधे घंटे तक एक इंच भी आगे बढ़ना मुश्किल हो गया। सड़क पर चारों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लगी थीं और एम्बुलेंस के सायरन की आवाज भी भीड़ के शोर में दबकर रह गई थी। परिजनों की लाख कोशिशों के बावजूद एम्बुलेंस को आगे बढ़ने का रास्ता नहीं मिल पा रहा था।
पूर्व पार्षद के बेटे ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया
इन तीस मिनटों ने युवक और उसके परिवार के बीच की दूरी को हमेशा के लिए बढ़ा दिया। जब तक किसी तरह एम्बुलेंस जाम से निकलकर अस्पताल पहुंची, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पूर्व पार्षद के बेटे ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया था। यह घटना मथुरा की यातायात व्यवस्था पर एक काला धब्बा है, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार को मातम में डुबो दिया। परिजन अब भी इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि सिर्फ जाम की वजह से उनके अपने को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। उनकी आंखों में आंसू हैं और जुबान पर सिर्फ एक ही सवाल है कि आखिर कब सुधरेगी मथुरा की यह फेल हो चुकी यातायात व्यवस्था? क्या आगे भी किसी और को इसी तरह अपनी जान गंवाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा?






