उत्तर प्रदेश में आगामी जनगणना 2027 को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं, जिसका उद्देश्य राज्य की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का विस्तृत और सटीक आकलन प्रस्तुत करना है। यह महत्वपूर्ण प्रक्रिया दो प्रमुख चरणों में संपन्न होगी, जिसके तहत पहले चरण में घरों का विस्तृत सर्वेक्षण किया जाएगा और दूसरे चरण में जनसंख्या के साथ-साथ जातिगत आंकड़े भी जुटाए जाएंगे। इस पूरी कवायद के उपरांत, 1 मार्च 2027 को देश की अंतिम जनसंख्या के आंकड़े आधिकारिक रूप से घोषित किए जाएंगे, जो भविष्य की नीतियों और योजनाओं के लिए आधार बनेंगे।
इस विशाल अभियान में लाखों की संख्या में प्रशिक्षित कर्मचारी शामिल होंगे। ये कर्मचारी घर-घर जाकर प्रत्येक परिवार और व्यक्ति से जुड़ी सामाजिक और आर्थिक जानकारी को अत्यंत सावधानीपूर्वक एकत्र करेंगे। इस विस्तृत जानकारी के संकलन से प्रदेश के विकास की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी। राज्य में जनगणना 2027 की तैयारियों ने अब तेज गति पकड़ ली है। जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक शीतल वर्मा ने हाल ही में आयोजित एक प्रेसवार्ता में इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस बहुप्रतीक्षित जनगणना प्रक्रिया पर वर्ष 2025 से ही गहन विचार-विमर्श चल रहा है और इसे निर्धारित दो चरणों में ही पूर्ण किया जाएगा, ताकि पूरी प्रक्रिया त्रुटिरहित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो।
जनगणना की अंतिम संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि 12 बजे निर्धारित की गई है। इसी क्षण तक के आंकड़ों को आधार मानकर देश की कुल जनसंख्या की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। यह समय-सीमा जनगणना की सटीकता और प्रामाणिकता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। निदेशक वर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि जनगणना की पूरी अवधि के दौरान, यानी 31 दिसंबर 2025 से 31 मार्च 2027 तक, सभी राजस्व प्रशासनिक इकाइयों को ‘फ्रीज’ कर दिया जाएगा। इस महत्वपूर्ण अवधि में, किसी भी नए गांव या तहसील का गठन नहीं किया जाएगा, ताकि प्रशासनिक सीमाओं में स्थिरता बनी रहे और जनगणना के आंकड़ों में कोई विसंगति न आए।
दो चरणों में पूरी होगी जनगणना
जनगणना के पहले चरण में मकानों की गणना (हाउस लिस्टिंग) का कार्य 22 मई से 20 जून 2026 तक संपन्न किया जाएगा। इस दौरान प्रत्येक घर की विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी। इसके पश्चात, दूसरे चरण में 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 तक प्रत्येक व्यक्ति की गणना का कार्य होगा, जिसमें व्यक्तिगत जानकारी के साथ-साथ जातिगत जनगणना के आंकड़े भी एकत्र किए जाएंगे। यह चरण सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।
जनगणना के लिए करीब 5 लाख कार्मिकों को किया जाएगा नियुक्त
इस विशाल अभियान को सुचारु रूप से चलाने के लिए, पूरे प्रदेश को लगभग 3.90 लाख गणना ब्लॉकों में सावधानीपूर्वक विभाजित किया गया है। इन ब्लॉकों में गणना कार्य को अंजाम देने के लिए करीब 5 लाख कार्मिकों को नियुक्त किया जाएगा। प्रत्येक गणना ब्लॉक में औसतन 800 से 1000 व्यक्तियों की गणना की जाएगी, जिससे आंकड़ों का संग्रहण व्यवस्थित और सटीक हो सके। जनगणना कर्मियों के प्रशिक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है। जनगणना से संबंधित प्रशिक्षण प्रक्रिया को 10 मई तक पूर्ण कर लिया जाएगा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों से लेकर फील्ड स्तर के ट्रेनरों तक की नियुक्ति की गई है, ताकि जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले प्रत्येक कर्मचारी को सभी बारीकियों से अवगत कराया जा सके और वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन कुशलतापूर्वक कर सकें।
जनगणना का यह महत्वपूर्ण कार्य घर-घर जाकर संपादित किया जाएगा। इसमें न केवल मकानों और संपत्तियों की विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित सामाजिक और आर्थिक पहलुओं का भी गहनता से अध्ययन किया जाएगा। इस व्यापक कवरेज में शहरी स्लम क्षेत्रों से लेकर दूरदराज के और शून्य आबादी वाले इलाकों को भी विशेष रूप से शामिल किया जाएगा, ताकि कोई भी वर्ग या क्षेत्र छूटने न पाए। इस विशाल अभियान के सफल क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश और समूचे देश की वर्तमान सामाजिक-आर्थिक स्थिति का एक विस्तृत और सटीक आकलन संभव हो पाएगा, जो भविष्य की विकास योजनाओं और नीतियों के निर्माण के लिए अमूल्य साबित होगा।






