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सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कार्यकर्ताओं को किया संबोधित, बोले- हर नागरिक की ढाल है संविधान

Written by:Gaurav Sharma
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कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है, जहां अग्रिम जमानत मिलने के बाद उन्होंने कहा कि संविधान दमनकारी सरकारों के खिलाफ लड़ने वाले लोगों की मदद करता है, जिससे यह सिद्ध होता है कि संविधान हर नागरिक की ढाल है।
सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कार्यकर्ताओं को किया संबोधित, बोले- हर नागरिक की ढाल है संविधान

देश की सर्वोच्च न्यायपालिका ने एक बार फिर संविधान की शक्ति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के महत्व को रेखांकित करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत दे दी है, जिसके बाद खेड़ा ने इस फैसले का गर्मजोशी से स्वागत किया और संविधान की सराहना की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत का संविधान उन सभी लोगों की सहायता करता है जो किसी दमनकारी सरकार के विरुद्ध संघर्षरत हैं, जिससे यह सिद्ध होता है कि संविधान हर नागरिक की ढाल है। यह महत्वपूर्ण निर्णय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1 मई को सुनाया गया, जिसमें पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया गया था। यह याचिका असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के खिलाफ कथित तौर पर की गई टिप्पणी से संबंधित प्राथमिकी के विषय में दायर की गई थी।

दिल्ली के हवाई अड्डे पर जब पवन खेड़ा का आगमन हुआ, तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया, जहां उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि डॉक्टर बीआर अंबेडकर द्वारा निर्मित भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक की रक्षा सुनिश्चित करता है। उन्होंने आगे बताते हुए कहा कि उन्हें जो राहत मिली है, वह भी इसी महान संविधान के कारण संभव हो पाई है, जो देश के हर नागरिक के अधिकारों का संरक्षक है। इस मामले में, जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के उस फैसले को रद्द कर दिया था, जिसमें उन्हें गिरफ्तारी से पहले सुरक्षा प्रदान करने से इनकार कर दिया गया था। पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि जांच बेशक ईमानदारी से होनी चाहिए, लेकिन संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता को किसी भी स्थिति में हल्के में खतरे में नहीं डाला जा सकता, जो कि नागरिकों का एक मौलिक अधिकार है। शीर्ष अदालत ने इस संबंध में यह भी निर्देश दिया कि यदि पवन खेड़ा को भविष्य में गिरफ्तार किया जाता है, तो उन्हें तुरंत अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाए, ताकि उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन न हो।

अदालत ने पवन खेड़ा को जमानत देते हुए रखी महत्वपूर्ण शर्तें

अदालत ने पवन खेड़ा को जमानत देते समय कुछ महत्वपूर्ण शर्तें भी निर्धारित कीं, जिसमें उन्हें जांच प्रक्रिया में पूरी तरह से सहयोग करने का निर्देश दिया गया। इसके अतिरिक्त, उन्हें आवश्यकता पड़ने पर पुलिस के समक्ष उपस्थित होना अनिवार्य होगा, ताकि जांच में कोई बाधा न आए। खेड़ा को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे किसी भी गवाह को प्रभावित करने या किसी भी प्रकार के सबूतों से छेड़छाड़ करने का प्रयास न करें, जिससे निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके। साथ ही, उन्हें सक्षम अदालत की पूर्व अनुमति प्राप्त किए बिना भारत देश नहीं छोड़ने का भी निर्देश दिया गया, जिससे उनकी उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके।

वहीं, कांग्रेस पार्टी ने भी शुक्रवार को पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत देने के सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश का खुले दिल से स्वागत किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश और सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार सर्वोपरि है और इसे हर हाल में संरक्षित किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी विशेष जोर दिया कि किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी अंतिम उपाय के तौर पर ही की जानी चाहिए, खासकर मानहानि जैसे मामलों में, जहां व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन आसानी से हो सकता है।

सिंघवी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि गिरफ्तारी को उचित ठहराने के लिए ‘ट्रिपल टेस्ट’ (जिसमें भागने का जोखिम, सबूतों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने की संभावना शामिल है) का पालन किया जाना चाहिए, ताकि गिरफ्तारी का आधार मजबूत हो। जयराम रमेश ने इस फैसले को देश की न्यायपालिका में उनके और पार्टी के विश्वास की एक और पुष्टि बताया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि न्यायपालिका नागरिकों के अधिकारों की संरक्षक है।

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