नामी ब्रांडेड कंपनियों के लोगो लगाकर नकली कपड़े बेचने वाले गिरोह पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 8 लाख 69 हजार रुपये मूल्य के जाली उत्पाद जब्त किए हैं, जिससे लाखों के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। इंदौर के छावनी क्षेत्र में संचालित एक दुकान पर दबिश देकर पुलिस ने यह सफलता हासिल की, जहां पूमा और अंडर आर्मर जैसे प्रतिष्ठित ब्रांडों के नकली टी-शर्ट, लोअर और जैकेट बेचे जा रहे थे।
दरअसल पुलिस ने संयोगितागंज थाना क्षेत्र में स्थित ताबा बिल्डिंग में संचालित ‘ह्यूमन इंटरप्राइजेज’ नामक प्रतिष्ठान पर गोपनीय सूचना के आधार पर छापा मारा। इस दौरान मौके पर मौजूद आरोपियों द्वारा ग्राहकों को गुमराह कर इन नकली उत्पादों को असली बताकर बेचा जा रहा था, जो कि सीधे तौर पर उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी और ब्रांड की छवि को धूमिल करने का प्रयास था। यह कार्रवाई ब्रांडेड उत्पादों के नाम पर चल रहे अवैध कारोबार पर एक बड़ा प्रहार मानी जा रही है, जिससे न केवल कंपनियों को वित्तीय हानि होती है, बल्कि उपभोक्ताओं का विश्वास भी डगमगाता है।
दुकान से भारी मात्रा में नकली माल बरामद किया
पुलिस टीम ने अपनी कार्रवाई के दौरान दुकान से भारी मात्रा में नकली माल बरामद किया। इसमें विशेष रूप से पूमा ब्रांड के लोगो वाले 1025 टी-शर्ट और लोअर शामिल थे, जिनकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 4 लाख 10 हजार रुपये आंकी गई है। इसके अतिरिक्त, अंडर आर्मर ब्रांड के लोगो लगी 510 जैकेट भी जब्त की गईं, जिनका मूल्य लगभग 4 लाख 59 हजार रुपये बताया जा रहा है। कुल मिलाकर, लगभग 8 लाख 69 हजार रुपये के नकली ब्रांडेड कपड़े पुलिस ने अपने कब्जे में लिए हैं, जो इस अवैध कारोबार के बड़े पैमाने को दर्शाता है। यह बरामदगी इस बात का संकेत है कि नकली माल का यह धंधा कितनी गहरी जड़ें जमा चुका था।
कॉपीराइट एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत विधिवत प्रकरण दर्ज किया
इस गंभीर मामले में पुलिस ने देवास के सिविल लाइन इलाके के निवासी गौरव नामदेव और उज्जैन निवासी उमेश उपाध्याय नामक दो व्यक्तियों को आरोपी बनाया है। इन दोनों के खिलाफ कॉपीराइट एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत विधिवत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है, और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। कॉपीराइट एक्ट के तहत कार्रवाई इसलिए की गई है क्योंकि आरोपियों ने बिना किसी अधिकृत अनुमति के इन प्रतिष्ठित ब्रांडों के लोगो और डिज़ाइन का उपयोग कर नकली उत्पाद बनाए और बेचे थे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई कंपनी की ओर से प्राप्त एक शिकायत के आधार पर की गई थी। मुंबई स्थित कंपनी के अधिकृत लीगल एडवाइजर सुमित शर्मा और मेहुल घोले ने पुलिस को शिकायत दर्ज कराते हुए बताया था कि उनके ब्रांड के नाम पर नकली उत्पादों की बिक्री की जा रही है, जिससे कंपनी को भारी वित्तीय और ब्रांड प्रतिष्ठा का नुकसान हो रहा है। कंपनी के प्रतिनिधियों ने पुलिस से इस अवैध कारोबार पर सख्त कार्रवाई करने का अनुरोध किया था।
सुनियोजित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है
प्राथमिक जांच और जब्त किए गए माल की मात्रा को देखते हुए पुलिस को आशंका है कि नकली ब्रांडेड कपड़ों का यह अवैध कारोबार केवल एक दुकान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े और सुनियोजित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जो कई शहरों में फैला हुआ है। पुलिस अब इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है ताकि इस पूरे गोरखधंधे का समूल नाश किया जा सके।
वर्तमान में पुलिस गिरफ्तार किए गए आरोपियों गौरव नामदेव और उमेश उपाध्याय से गहन पूछताछ कर रही है। पूछताछ का मुख्य उद्देश्य इस नकली माल की आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) का पता लगाना है कि ये उत्पाद कहां से आ रहे थे और इन्हें कहां-कहां वितरित किया जा रहा था। साथ ही, इस पूरे अवैध नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों और उनके ठिकानों की जानकारी भी जुटाई जा रही है ताकि इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जा सके और नकली उत्पादों के इस गोरखधंधे पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सके। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस मामले में जो भी अन्य लोग शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।






