Hindi News

BHU के विवादित सवाल से गरमाई सियासत, अखिलेश यादव ने बोला हमला, कहा- संस्थानों को बदनाम कर रही BJP

Written by:Gaurav Sharma
Published:
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने BHU के विवादित सवाल, NEET पेपर लीक, बढ़ती महंगाई और गिरते रुपये को लेकर BJP पर जमकर निशाना साधा है, इसे 'सोची समझी रणनीति' बताया।
BHU के विवादित सवाल से गरमाई सियासत, अखिलेश यादव ने बोला हमला, कहा- संस्थानों को बदनाम कर रही BJP

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) में एक विवादित प्रश्नपत्र सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है, जिस पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को भारतीय जनता पार्टी की ‘सोची समझी रणनीति’ करार दिया है। अखिलेश यादव ने मीडिया से मुखातिब होते हुए सवाल उठाया कि BHU जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में ऐसे ‘टेढ़े-मेढ़े’ सवाल क्यों पूछे जा रहे हैं। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी पहले ऐसे संस्थानों को बदनाम करती है, और फिर उन पर हमसे सवाल पूछे जाते हैं। सपा प्रमुख ने दावा किया कि यह सब बीजेपी के इशारे पर हो रहा है और पार्टी ही इन सबके पीछे है।

अखिलेश यादव ने मदनमोहन मालवीय जैसे महान पुरुषों द्वारा स्थापित इस प्रतिष्ठित संस्थान की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने ऐसे ऐतिहासिक संस्थानों का क्या हाल कर दिया है, यह विचारणीय है। यह पहली बार नहीं है जब उत्तर प्रदेश में परीक्षाओं में ब्राह्मण समुदाय से जुड़े सवालों पर विवाद छिड़ा हो। इससे पहले भी ऐसे प्रश्न पूछे गए हैं, जिन्हें ब्राह्मण संगठन अपना अपमान मानते हुए प्रदेशभर में बवाल कर चुके हैं। अब BHU के प्रश्नपत्र में ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ को लेकर पूछे गए सवाल ने एक बार फिर सियासी पारा चढ़ा दिया है। ब्राह्मण महासभा ने इस सवाल पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिससे यह विवाद और गहरा गया है।

अखिलेश यादव ने NEET पेपर लीक मामले पर भी सरकार को घेरा

BHU विवाद के अलावा, अखिलेश यादव ने देश में बार-बार हो रहे नीट (NEET) पेपर लीक मामले पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने बताया कि सभी को पता है कि किस तरह नीट का पेपर एक बार फिर लीक हो गया। सपा अध्यक्ष ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पकड़े गए लोगों में भी बीजेपी के लोग शामिल हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब नीट परीक्षा, ‘लीक परीक्षा’ बन गई है। अखिलेश यादव ने इस पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि केवल 22 लाख छात्र ही इससे प्रभावित नहीं हुए हैं, बल्कि उनके पूरे परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि परीक्षा रद्द होने या धांधली होने से छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो जाता है और उनके माता-पिता की उम्मीदों को भी बड़ा झटका लगता है।

अखिलेश यादव ने बढ़ती महंगाई को लेकर भाजपा सरकार पर साधा निशाना

अखिलेश यादव यहीं नहीं रुके। उन्होंने बढ़ती महंगाई और रुपये की गिरती क़ीमतों को लेकर भी बीजेपी सरकार पर जमकर निशाना साधा। पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों और गैस सिलेंडर के बढ़ते दाम पर सवाल उठाते हुए उन्होंने बीजेपी से पूछा कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो सरकार को इन्हें इतना महंगा करना पड़ा? उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को इसका जवाब देना चाहिए और वह इससे बच नहीं सकती है। सपा प्रमुख ने कहा कि आम जनता महंगाई की मार से त्रस्त है और सरकार इस पर चुप्पी साधे हुए है।

इसके साथ ही, अखिलेश यादव ने रुपये की लगातार गिरती क़ीमत पर भी चिंता जताई। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि वह यह आंकड़ा देना क्यों भूल जाती है कि हमारा रुपया और कितना गिरेगा। सपा प्रमुख ने व्यंगात्मक लहजे में कहा कि अब तो ऐसा लगता है कि रुपये ने पाताल लोक की तरफ अपनी दिशा बना ली है। उन्होंने कहा कि सरकार को अर्थव्यवस्था की इस गंभीर स्थिति पर ध्यान देना चाहिए और केवल आंकड़ों की बाजीगरी से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस कदम उठाने होंगे।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma
Follow Us :GoogleNews