लखनऊ में शनिवार को हुई समाजवादी पार्टी की प्रेस वार्ता में राजनीतिक हमला सीधे महंगाई और शासन पर केंद्रित रहा। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया कि टैक्स का बोझ बढ़ाते हुए आम आदमी की राहत कम की जा रही है। कार्यक्रम की शुरुआत में उन्होंने पूर्व DIG राम शरद राम समेत पार्टी में शामिल हुए लोगों का स्वागत किया और कहा कि बड़े पैमाने पर सदस्यता बढ़ना जनता के झुकाव का संकेत है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में महंगाई को लेकर उनकी भाषा बेहद स्पष्ट रही। अखिलेश ने कहा कि सरकारें पहले परिस्थितियों का हवाला देकर कीमतें बढ़ाती हैं, फिर कमी का वादा करती हैं, लेकिन एक बार महंगी हुई चीजें वापस सस्ती नहीं होतीं। LPG सिलेंडर के दाम में 60 रुपये बढ़ने का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे सीधे घरेलू बजट पर असर बताकर BJP पर हमला तेज किया।
“हमारी समझ में एक ही बात आती है कि जब जाएंगे भाजपाई तभी हटेगी महंगाई।” — अखिलेश यादव
टैक्स, वाहन कीमत और आर्थिक बोझ पर हमला
अखिलेश यादव ने कहा कि वाहन महंगे होने की बड़ी वजह टैक्स संरचना है। उनके मुताबिक गाड़ियों पर करीब 50 प्रतिशत तक टैक्स लगने से जनता पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बन रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन राज्यों में BJP की सरकार है, वहां लोगों को रोजमर्रा की लागत और सेवाओं में ज्यादा परेशानी दिख रही है।
सपा प्रमुख ने अपनी सरकार के कामों का हवाला देकर तुलना की राजनीति भी की। उन्होंने कहा कि समाजवादी सरकार के समय एक्सप्रेसवे, लैपटॉप वितरण, रिवरफ्रंट, लोकभवन, कैंसर इंस्टीट्यूट, बड़ी यूनिवर्सिटी, डायल 100 और एंबुलेंस जैसी परियोजनाएं शुरू हुईं। थर्मल प्लांट के मुद्दे पर उन्होंने BJP से सवाल किया कि यूपी में उसने एक भी नया थर्मल प्लांट बनाया हो तो बताया जाए।
कानून-व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर सवाल
प्रेस वार्ता का दूसरा बड़ा हिस्सा कानून-व्यवस्था पर रहा। अखिलेश यादव ने कानपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों की कॉल डिटेल सामने आने पर अपराधियों को सूचना देने के आरोप उभरे। उन्होंने गांजा तस्करी से जुड़ी कार्रवाई का जिक्र करते हुए पूछा कि जब बड़ी मात्रा में बरामदगी दिखाई जाती है तो उसका अंतिम हिसाब और प्रवाह पारदर्शी क्यों नहीं होता।
उन्होंने BJP से जुड़े एक गीत को लेकर भी आपत्ति दर्ज की और कहा कि सपा को बदनाम करने की कोशिश हुई है। इस मामले में FIR दर्ज कराने की बात कहते हुए उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि जांच और कार्रवाई से ही पता चलेगा कि जिम्मेदार लोगों तक कानून पहुंचता है या नहीं।
चुनाव आयोग, विदेश नीति और बिहार राजनीति पर टिप्पणियां
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी प्रश्न उठाए। उनका आरोप था कि सपा कार्यकर्ताओं ने आवाज न उठाई होती तो कई क्षेत्रों में वोट काटने की तैयारी आगे बढ़ जाती। उन्होंने नंदलाल और सरोजनीनगर का उल्लेख करते हुए कहा कि एक ही हस्ताक्षर से कई वोट हटाने की कोशिश का मामला सामने आया था, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर उन्होंने ईरान-इजराइल युद्ध के संदर्भ में कहा कि जो भारतीय वापस आना चाहते हैं, उन्हें सुरक्षित लाना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने रूस को भारत का पुराना मित्र बताते हुए कहा कि यदि रूस से सस्ता तेल उपलब्ध है तो भारत को अधिक खरीद पर विचार करना चाहिए, ताकि अर्थव्यवस्था को लाभ मिल सके।
बिहार की राजनीति पर पूछे गए सवाल में अखिलेश यादव ने कहा कि पहले चर्चा थी कि नीतीश कुमार प्रधानमंत्री बन सकते हैं, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। इसी दौरान उन्होंने केशव प्रसाद मौर्य पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें नया हेलीकॉप्टर मिलना चाहिए। लखनऊ में 13 साल के बच्चे की गोली लगने से मौत के मामले में उन्होंने परिवार की मदद की बात कही। शंकराचार्य पर लगाए जा रहे आरोपों को लेकर भी उन्होंने कहा कि इससे शंकराचार्य के साथ-साथ सनातन की छवि पर असर पड़ता है।
प्रेस वार्ता में मौजूद शिवपाल यादव ने भी सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ट्रांसपोर्ट क्षेत्र, मजदूर वर्ग और आम जनता तक में असंतोष है। शिवपाल का दावा रहा कि नौ साल में सड़कों के गड्ढों के नाम पर भारी खर्च दिखाया गया, लेकिन जमीन पर हालात संतोषजनक नहीं हैं।
“इतनी भ्रष्ट सरकार अभी तक के इतिहास में नहीं हुई, सारे रिकॉर्ड इस सरकार ने तोड़ दिए।” — शिवपाल यादव
अंत में अखिलेश यादव ने PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) सामाजिक समीकरण को सपा की राजनीतिक दिशा बताते हुए कहा कि आने वाले समय में इसी आधार पर सरकार बनाने का लक्ष्य है। उनका कहना था कि शोषित और पीड़ित वर्गों को जोड़कर ही प्रदेश में विकल्प मजबूत होगा और जनता को राहत दिलाने की रणनीति आगे बढ़ेगी।






