उत्तर प्रदेश में एक कर्मचारी के डिमोशन को लेकर इन दिनों सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है, जिसमें समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। अखिलेश यादव ने एक महिला के पिता का डिमोशन किए जाने पर भारतीय जनता पार्टी को आड़े हाथों लिया है, इसे भाजपा की निकृष्ट राजनीति का परिणाम बताया है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के समर्थन में उत्तर प्रदेश में एक पोस्टर लगाया गया है जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मोहन यादव पर उनके द्वारा की गई टिप्पणी पर माफ़ी मांगने के लिए कहा गया है, भाजपा नेता ने मोहन यादव पर अखिलेश यादव द्वारा की गई टिप्पणी को पूरे समाज का अपमान कहा है।
दरअसल, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को डॉ अंबेडकर की जयंती पर भंडारा खिलाने वाली महिला अंजली मैसी के पिता का डिमोशन कर उन्हें सुपरवाइजर से सफाईकर्मी बना दिया गया है। वहीं यह घटना सामने आने के बाद अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर जमकर निशाना साधा है। सपा मुखिया ने इस कार्रवाई को इतनी अप्रिय राजनीति बताया है, जो कि अंग्रेजों ने भी नहीं की थी। उन्होंने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकार की राजनीति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इसकी जितनी निंदा की जाए, वह कम है।
अखिलेश यादव ने भाजपा पर साधा निशाना
अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से भाजपा सरकार पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के विरोधी थे और हमेशा ही विरोधी रहेंगे। सपा मुखिया ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘पीडीए समाज की एक महिला के पिता को, पुरुषवादी भाजपा सरकार सिर्फ़ इसलिए प्रताड़ित कर रही है क्योंकि हमने ‘बाबासाहेब जी की जयंती’ पर अपनी उस छोटी बहन के यहाँ पूड़ी खा ली थी।’ उन्होंने आगे कहा कि इतनी निकृष्ट राजनीति तो उन अंग्रेजों ने भी नहीं की थी, जिनके लिए भाजपा के वज़ीफ़ाजीवी वैचारिक पूर्वज संगी-साथी मुख़बिरी करते थे। अखिलेश यादव ने इस बात का भी जिक्र किया कि इससे पहले भी उनके चाय पीने की वजह से एक आत्मनिर्भर पीडीए चायवाले युवा को भाजपा सरकार ने प्रताड़ित किया था। सपा प्रमुख ने अपनी बात समाप्त करते हुए लिखा कि भाजपा पीडीए विरोधी है, और हमेशा रहेगी, यह घोर निंदनीय है।

इसे राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बताया
सपा मुखिया ने इससे पहले बुधवार को लखनऊ में हुई एक प्रेस कांफ्रेंस में भी इस घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था। उन्होंने पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में कहा कि ‘ये अफसोस की बात है। हमारा उनसे कोई परिचय नहीं था।’ अखिलेश यादव ने आगे बताया कि वह एक गुरुद्वारे में गए थे, जहां अंजलि मैसी से उनका परिचय हुआ था, और बगल में ही भंडारा हो रहा था। उन्होंने कहा कि वह वहां चले गए और प्रसाद ग्रहण किया। सपा प्रमुख ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह कार्रवाई भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर की गई है और यह राजनीतिक प्रतिशोध का मामला है।
जानिए क्या है पूरा मामला?
पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया गया कि 14 अप्रैल को डॉ भीम राव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर कैंटोनमेंट बोर्ड के एक कर्मचारी उमेश कुमार ने भंडारे का आयोजन किया था। इसी भंडारे में उनकी बेटी अंजलि मैसी के बुलावे पर अखिलेश यादव ने आलू-पूरी खाई थी। अखिलेश यादव के भंडारे में शामिल होने और प्रसाद ग्रहण करने के कुछ समय बाद ही उमेश कुमार के डिमोशन की बात सामने आई है। हालांकि, इस पूरे मामले पर अधिकारियों का एक अलग ही पक्ष सामने आया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई अखिलेश यादव को प्रसाद देने की वजह से नहीं की गई है, बल्कि यह सेवा आचरण नियम के उल्लंघन की वजह से की गई है। अधिकारियों ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि डिमोशन का संबंध किसी भी राजनीतिक या व्यक्तिगत मुलाकात से नहीं है, बल्कि यह विभागीय नियमों के उल्लंघन का परिणाम है।






