समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), चुनाव आयोग और अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शनिवार को उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि ‘भाजपा-चुनाव आयोग-अधिकारी’ की ‘घपला तिकड़ी’ मिलकर ‘वोट-डकैती’ कर रही है। यादव ने कहा, “ये वो तीन तिगाड़ा हैं, जिनकी साठगांठ ने देश का वर्तमान और भविष्य बिगाड़ दिया है।” उनका यह बयान हाल के दिनों में उनके लगातार हमलों की कड़ी में है, जिसमें वे वोटर लिस्ट में हेरफेर और चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगा रहे हैं।
अखिलेश यादव ने पहले भी कई मौकों पर भाजपा पर सत्ता का दुरुपयोग कर वोट चोरी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि उपचुनावों में भी वोटों की डकैती हुई है और भाजपा गरीबों के वोटों को कटवा रही है। सपा ने 2022 में वोटर लिस्ट से गलत तरीके से हटाए गए वोटों का मुद्दा उठाया था, जिसके जवाब में चुनाव आयोग ने पार्टी को नोटिस भेज दिया था। यादव का कहना है कि उनकी पार्टी ने इस मुद्दे को बार-बार उठाया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
चुनाव आयोग की निष्क्रियता पर सवाल उठाए
सपा ने दावा किया कि उन्होंने वोटर लिस्ट से हटाए गए 18 हजार वोटरों की सूची शपथ पत्र के साथ चुनाव आयोग को सौंपी थी। हालांकि, मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि उन्हें ऐसा कोई शपथ पत्र प्राप्त नहीं हुआ। इस पर सपा ने जवाब दिया कि उनके पास हर शपथ पत्र की रसीद मौजूद है। यादव ने इस मामले को लेकर चुनाव आयोग की निष्क्रियता पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि आयोग इस ‘वोट-डकैती’ में शामिल है।
चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए
अखिलेश यादव के इन बयानों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। समाजवादी पार्टी लगातार इस मुद्दे को जनता के बीच ले जा रही है, ताकि मतदाता जागरूक हों और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए जाएं। दूसरी ओर, भाजपा और चुनाव आयोग की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। यह विवाद आगामी चुनावों में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि सपा इसे एक बड़े मुद्दे के रूप में प्रचारित कर रही है।
