ब्रजमंडल के मंदिरों और आश्रमों में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के बाद नंदोत्सव का उल्लास छाया रहेगा, जहां भक्तों को उपहार बांटे जाएंगे। वृंदावन के दक्षिण भारतीय परंपरा वाले रंगजी मंदिर में नंदोत्सव अनोखे अंदाज में मनाया जाएगा। 19 अगस्त को आयोजित होने वाले लट्ठा मेले में अंतरयामी अखाड़े के पहलवान तेल से चिकने खंभे पर चढ़ने की चुनौती स्वीकार करेंगे। यह अनूठा आयोजन मंदिर की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को जीवंत करता है।

रंगजी मंदिर में दक्षिण भारतीय पंचांग के अनुसार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 18 अगस्त को मनाई जाएगी। अगले दिन, 19 अगस्त की शाम को मंदिर परिसर में नंदोत्सव के रूप में लट्ठा मेला आयोजित होगा। इस मेले में 40 फीट ऊंचे खंभे पर तेल और पानी का मिश्रण डालकर उसे चिकना किया जाएगा। अंतरयामी अखाड़े के पहलवान सात बार के प्रयास में खंभे पर चढ़ने का प्रयास करेंगे, और सफल होने पर मंदिर की ओर से उन्हें ठाकुरजी की प्रसादी और उपहार भेंट किए जाएंगे।

ठाकुरजी का पंचगव्य से महाभिषेक

रंगजी मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की रात ठाकुरजी का पंचगव्य से महाभिषेक किया जाएगा। वेदमंत्रों की गूंज के बीच भगवान को सुंदर पोशाक और आभूषण पहनाए जाएंगे। यह दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार आयोजित होने वाला भव्य पूजन भक्तों के लिए आध्यात्मिक अनुभव का केंद्र होगा। अगले दिन नंदोत्सव के रूप में लट्ठा मेला मंदिर की सांस्कृतिक विरासत को और समृद्ध करेगा।

लट्ठा मेले की अनूठी परंपरा

मंदिर की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनघा श्रीनिवासन के अनुसार, लट्ठा मेले के लिए मंदिर के मुख्य प्रवेशद्वार के बाहर 40 फीट का खंभा स्थापित किया जाता है, जिसे तेल से चिकना किया जाता है। खंभे के शिखर पर मचान बनाकर तेल, पानी और हल्दी का मिश्रण डाला जाता है। पहलवान एक-दूसरे के ऊपर चढ़कर खंभे पर पहुंचने का प्रयास करते हैं, लेकिन मिश्रण के कारण अक्सर फिसल जाते हैं। सात प्रयासों में सफल होने वाले पहलवानों को ठाकुरजी का आशीर्वाद और उपहार प्रदान किए जाते हैं, जो इस परंपरा को और भी खास बनाता है।