बसपा में एक और बड़ा बदलाव; मायावती ने समधी पर जताया भरोसा, सौंपी चार राज्यों की कमान

अशोक सिद्धार्थ, जो आकाश आनंद के ससुर हैं, को कुछ समय पहले पार्टी विरोधी गतिविधियों और गुटबाजी के आरोप में बसपा से निष्कासित कर दिया गया था।
बसपा में एक और बड़ा बदलाव; मायावती ने समधी पर जताया भरोसा, सौंपी चार राज्यों की कमान

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में एक बार फिर संगठनात्मक स्तर पर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद के ससुर और पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ पर भरोसा जताते हुए उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। अशोक सिद्धार्थ को सेक्टर-3 का केंद्रीय कोऑर्डिनेटर नियुक्त कर छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और गुजरात में पार्टी को मजबूत करने का दायित्व दिया गया है। यह कदम बसपा के संगठन को और सशक्त करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

अशोक सिद्धार्थ, जो आकाश आनंद के ससुर हैं, को कुछ समय पहले पार्टी विरोधी गतिविधियों और गुटबाजी के आरोप में बसपा से निष्कासित कर दिया गया था। हाल ही में, उन्होंने मायावती से सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए अपनी गलतियों को स्वीकार किया और पार्टी में वापसी की गुहार लगाई। मायावती ने उनके माफी पत्र और भविष्य में पार्टी अनुशासन का पालन करने के आश्वासन को स्वीकार करते हुए उन्हें दोबारा पार्टी में शामिल किया। अब उनकी यह नियुक्ति उनके प्रति मायावती के भरोसे को दर्शाती है।

संगठनात्मक ढांचे में फेरबदल

मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को सेक्टर-3 का केंद्रीय कोऑर्डिनेटर बनाया, जो पहले रणधीर सिंह बेनीवाल के पास था। बेनीवाल को अब सेक्टर-4 की जिम्मेदारी दी गई है, जिसे पहले डॉ. लालजी मेधांकर देख रहे थे। मेधांकर को सेक्टर-5 और पूर्व विधायक अतर सिंह राव को सेक्टर-6 का दायित्व सौंपा गया है, जो पहले धर्मवीर सिंह के पास था। सेक्टर-1 और सेक्टर-2 के केंद्रीय कोऑर्डिनेटर, क्रमशः रामजी गौतम और राजाराम, अपनी जिम्मेदारियों पर बरकरार रहेंगे। बसपा ने देश को छह संगठनात्मक सेक्टरों में बांटा है, जिसमें प्रत्येक सेक्टर में तीन से चार राज्य शामिल हैं।

आकाश आनंद को समीक्षा का जिम्मा

मायावती ने सभी सेक्टर कोऑर्डिनेटरों के कार्यों की समीक्षा का दायित्व राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद को सौंपा है। यह कदम पार्टी के संगठन को और अधिक प्रभावी बनाने और आगामी चुनावों के लिए रणनीति तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। अशोक सिद्धार्थ की नई जिम्मेदारी और संगठन में किए गए फेरबदल से बसपा उत्तर भारत के साथ-साथ अन्य राज्यों में अपनी स्थिति को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। यह बदलाव मायावती की रणनीति को दर्शाता है, जिसमें पुराने और अनुभवी नेताओं के साथ नए नेतृत्व को संतुलित करने का प्रयास किया गया है।

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