अयोध्या के राजघाट में शनिवार को उत्तर प्रदेश सरकार में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह की अध्यक्षता में चल रहे श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में अज्ञात कारणों से भीषण आग लग गई। यज्ञ के समापन के दिन हुई इस भयावह घटना में 3-4 लोगों के घायल होने की खबर है, हालांकि प्रशासन ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। मंत्री की मौजूदगी वाले ऐसे बड़े आयोजन में आग लगने के बाद फौरन ही सियासत भी शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसे ‘प्रशासनिक चूक’ बताया है और सरकार पर गंभीर भ्रष्टाचार व लापरवाही के आरोप लगाए हैं, जिससे प्रदेश की राजनीति में गर्माहट साफ देखी जा रही है।
राजघाट स्थित यज्ञ स्थल पर यह घटना उस वक्त हुई जब महायज्ञ अपने समापन की ओर था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हवन कुंड से निकली तेज हवाओं के चलते एक चिंगारी ने पहले पास के कुछ अस्थायी ढांचों और फिर पंडालों को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। देखते ही देखते पूरा क्षेत्र धुएं और आग की लपटों से घिर गया। यज्ञ में शामिल होने आए हजारों श्रद्धालुओं और आयोजकों में अचानक अफरा-तफरी मच गई। अपनी जान बचाने के लिए लोग इधर-उधर भागने लगे, जिससे कुछ देर के लिए भगदड़ जैसी स्थिति बन गई थी।
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यज्ञ स्थल को तुरंत करवाया खाली, जांच के आदेश
सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, प्रशासन और फायर ब्रिगेड की टीमें आनन-फानन में मौके पर पहुंचीं। अग्निशमन दल ने आग पर काबू पाने के लिए कड़ी मशक्कत की, जबकि पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करते हुए पूरे यज्ञ स्थल को तुरंत खाली करवाया। इस प्रक्रिया में कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं। बताया जा रहा है कि तीन से चार लोगों को धुएं के कारण सांस लेने में दिक्कत और हल्की जलन हुई थी, जिन्हें घटनास्थल पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। सौभाग्य से, किसी भी व्यक्ति को गंभीर चोट नहीं आई और कोई जनहानि नहीं हुई। घटना के बाद वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं, ताकि आग लगने के सही कारणों का पता चल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
हादसे पर अखिलेश यादव की तीखी प्रतिक्रिया, सरकार पर लगाया आरोप
इस अग्निकांड पर समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा,
“अयोध्या में यज्ञ के बाद लगी आग सही प्रबंधन-प्रशासन की कमी को दर्शाती है। आशा है सब सुरक्षित होंगे।”
अखिलेश यादव ने इस घटना को एक सामान्य हादसा मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने आगे कहा कि “इस बात की जाँच हो कि इस यज्ञ की व्यवस्था के पीछे जो आर्थिक और मानवीय स्रोत लगे थे, उनके पीछे कौन था।” यह बयान सीधे तौर पर आयोजकों की फंडिंग, संसाधनों के स्रोत और उनके पीछे के प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका पर सवाल खड़ा करता है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव यहीं नहीं रुके, उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और सीधे तौर पर परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह पर एक बेहद गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि
“जनता में फैली ये बात बेहद निंदनीय है कि इस यज्ञ के नाम पर मंत्री जी से संबंधित विभाग से विभागीय स्तर पर बड़ी वसूली हुई और पैसे बचाने के चक्कर में विशेषज्ञों की देखरेख के बिना ही ये आयोजन हुआ।”
यह आरोप सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और लापरवाही की ओर इशारा करता है। अखिलेश के मुताबिक, मंत्री के विभाग से ‘वसूली’ की गई और उसी पैसे को बचाने के लिए सुरक्षा मानकों तथा विशेषज्ञ सलाह की अनदेखी की गई, जिसके परिणामस्वरूप यह भयावह आग लगी। यह आरोप उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया भूचाल लाने की क्षमता रखता है और सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
यह घटना इसलिए भी अधिक संवेदनशील हो जाती है क्योंकि श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का आयोजन प्रदेश सरकार में एक महत्वपूर्ण मंत्री, दयाशंकर सिंह की अध्यक्षता में किया जा रहा था। अयोध्या जैसे धार्मिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर में, जहां हाल के समय में कई बड़े आयोजन हुए हैं, ऐसे बड़े धार्मिक अनुष्ठान में सुरक्षा चूक होना गंभीर मसला है। यह घटना न केवल मंत्री के आयोजन कौशल और उनके विभाग की देखरेख पर सवाल उठाती है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की तैयारियों और आपातकालीन स्थितियों से निपटने की सतर्कता पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।
इस अग्निकांड ने एक बार फिर बड़े सार्वजनिक और धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा प्रोटोकॉल, भीड़ प्रबंधन और अग्नि सुरक्षा उपायों की गंभीरता पर सोचने पर मजबूर किया है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में, जहां धार्मिक आयोजनों की संख्या काफी अधिक होती है, वहां ऐसे आयोजनों में सुरक्षा सुनिश्चित करना हमेशा एक बड़ी चुनौती बनी रहती है। अखिलेश यादव के इन गंभीर आरोपों के बाद अब सरकार पर इस पूरे मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच कराने, दोषियों की पहचान करने और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का भारी दबाव है।