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आजम खान को कोर्ट ने सुनाई 2 साल की सजा, भाजपा की पहली प्रतिक्रिया आई सामने, कहा – ‘यह सभी नेताओं के लिए एक बड़ा सबक’

Written by:Ankita Chourdia
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रामपुर की अदालत ने सपा नेता आजम खान को 2 साल की सजा सुनाई है, जिस पर भाजपा ने कहा है कि यह उन नेताओं के लिए सबक है जो अधिकारियों का अपमान करते हैं। चलिए जानते हैं पूरा मामला।
आजम खान को कोर्ट ने सुनाई 2 साल की सजा, भाजपा की पहली प्रतिक्रिया आई सामने, कहा – ‘यह सभी नेताओं के लिए एक बड़ा सबक’

रामपुर की एमपी एमएलए कोर्ट ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को एक पुराने मामले में दो साल की सजा सुनाकर न्यायपालिका की निष्पक्षता और कानून के राज को फिर से स्थापित करने का संदेश दिया है, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने तुरंत अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे उन नेताओं के लिए सबक बताया जो अक्सर अपनी सीमाओं को भूल जाते हैं। दरअसल यह फैसला साल 2019 में दिए गए उनके एक भड़काऊ बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने सरकारी अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं, जिस पर कोर्ट ने कानून की चार अलग-अलग धाराओं के तहत दो-दो साल की सजा के साथ प्रत्येक धारा में पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

सभी नेताओं के लिए एक बड़ा सबक

वहीं अदालत के इस महत्वपूर्ण फैसले पर भारतीय जनता पार्टी की पहली और तीखी प्रतिक्रिया रामपुर से भाजपा विधायक आकाश सक्सेना की ओर से आई, जिन्होंने इसे उन सभी नेताओं के लिए एक बड़ा सबक बताया जो अक्सर जनता की तालियां बटोरने के चक्कर में सरकारी अधिकारियों के खिलाफ अपमानजनक और अमर्यादित टिप्पणियां करने से गुरेज नहीं करते। सक्सेना ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसे नेता अक्सर यह भूल जाते हैं कि जो मानदंड और नियम वे दूसरों पर लागू करते हैं, वही एक दिन उन पर भी लागू होते हैं और यह अदालत का फैसला अपने आप में एक ऐतिहासिक निर्णय है जो भविष्य के लिए एक नजीर स्थापित करेगा।

आजम खान के भड़काऊ भाषण से जुड़ा था मामला

मामले की कानूनी पेचीदगियों को समझाते हुए एडवोकेट संदीप सक्सेना ने बताया कि यह पूरा प्रकरण आजम खान के एक भड़काऊ भाषण से जुड़ा हुआ था, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ अत्यंत आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियां की थीं। उन्होंने आगे बताया कि एमपी/एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सभी चारों संबंधित धाराओं के तहत दो-दो साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही प्रत्येक धारा में पांच हजार रुपये का जुर्माना भी आरोपित किया गया है, जो उन्हें भरना होगा।

मर्यादा का उल्लंघन किया

वहीं, इस मामले की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए एडवोकेट स्वदेश शर्मा ने जानकारी दी कि यह पूरा मामला साल 2019 का है, जब लोकसभा चुनाव के दौरान आजम खान ने जिला प्रशासन के अधिकारियों के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। उन्होंने बताया कि उस समय चुनाव आचार संहिता भी लागू हो चुकी थी और इससे पहले भी आजम खान पर चुनाव आयोग द्वारा 48 घंटे और 72 घंटे के प्रतिबंध लगाए जा चुके थे। इन प्रतिबंधों के बाद लिखित माफी देने के बावजूद, उन्होंने दोबारा वही आचरण किया और मर्यादा का उल्लंघन किया, जिसके बाद उनके खिलाफ सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज किया गया था।

शर्मा ने आगे विस्तार से बताया कि इस मामले में जांच अधिकारी ऋषिपाल सिंह ने पूरी जांच पड़ताल के बाद चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल आठ गवाह पेश किए गए थे, जो सभी सरकारी कर्मचारी थे और जिन्होंने प्रत्यक्षदर्शी के रूप में अपने बयान दर्ज कराए थे। मामले में वीडियो साक्ष्य भी शामिल था, जिसकी सत्यता को आरोपी पक्ष यानी आजम खान और उनके वकीलों ने कभी भी चुनौती नहीं दी। अदालत ने इन्हीं ठोस साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आजम खान को दो साल के साधारण कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है, जो कानून के समक्ष सभी की समानता का प्रमाण है। यह फैसला एक बार फिर साबित करता है कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है और सार्वजनिक जीवन में शब्दों की मर्यादा बनाए रखना कितना आवश्यक है।

Ankita Chourdia
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