कहानी बागपत के लाल की; भाला फेंक का नया सितारा सचिन यादव, चोटों और मुश्किलों के बावजूद नहीं मानी हार

करियर में एक समय ऐसा भी आया जब नौकरी मिलने के बाद सचिन यादव ने दो महीने तक प्रशिक्षण छोड़ दिया था। उस दौर में पड़ोसी संदीप यादव ने उन्हें प्रेरित कर दोबारा मैदान में लौटाया।
कहानी बागपत के लाल की; भाला फेंक का नया सितारा सचिन यादव, चोटों और मुश्किलों के बावजूद नहीं मानी हार

बागपत के खेकड़ा निवासी 25 वर्षीय सचिन यादव ने भाला फेंक में अपनी मेहनत और जज्बे से नई मिसाल कायम की है। छह फुट पांच इंच लंबे और करीब 100 किलो वजन वाले इस खिलाड़ी ने अपनी पहली विश्व चैंपियनशिप में 84.39 मीटर का रिकॉर्ड थ्रो कर स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने न केवल अपने आदर्श नीरज चोपड़ा को पीछे छोड़ा, बल्कि पेरिस ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम और डाइमंड लीग विजेता जूलियन वेबर को भी मात दी।

सचिन की राह कभी आसान नहीं रही। शुरुआती दिनों में उनकी थ्रो तकनीक कमजोर थी और भाला अक्सर सही दिशा में नहीं जाता था। अपने लंबे कद और भारी शरीर के साथ तालमेल बैठाना उनके लिए बड़ी चुनौती था। इसके लिए उन्होंने घंटों अभ्यास किया और फिटनेस पर विशेष ध्यान दिया। बार-बार असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी कमियों को दूर करने के लिए कड़ी मेहनत की।

2 महीने तक ट्रेनिंग छोड़ दी 

करियर में एक समय ऐसा भी आया जब नौकरी मिलने के बाद सचिन यादव ने दो महीने तक प्रशिक्षण छोड़ दिया था। उस दौर में पड़ोसी संदीप यादव ने उन्हें प्रेरित कर दोबारा मैदान में लौटाया। सचिन का मानना है कि अगर उस समय उन्होंने अभ्यास दोबारा शुरू नहीं किया होता, तो शायद आज यह मुकाम हासिल नहीं कर पाते। उनकी इस वापसी ने उन्हें नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

नेशनल गेम्स के दौरान हुए चोटिल

चोटें भी सचिन के लिए बार-बार मुश्किलें खड़ी करती रहीं। देहरादून में आयोजित नेशनल गेम्स के दौरान भी वे चोटिल हो गए थे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पूरे जज्बे के साथ उन्होंने 84.39 मीटर का ऐतिहासिक थ्रो किया, जिसने उन्हें स्वर्ण पदक दिलाया और बागपत का नाम रोशन किया। आज सचिन यादव हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं और भाला फेंक की दुनिया में भारत का गौरव बढ़ा रहे हैं।

लेखक के बारे में
Follow Us :GoogleNews