उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। दरअसल नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद की पार्टी ने घोषणा की है कि वह किसी भी बड़े राजनीतिक दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी और अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरेगी। इसी दिशा में पार्टी ने उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके तहत 13 से 18 जून तक लखनऊ में टिकट दावेदारों के इंटरव्यू लिए जाएंगे।
दरअसल यूपी की राजनीति में गठबंधन और समीकरणों की चर्चाओं के बीच आजाद समाज पार्टी का यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है। पार्टी का कहना है कि वह अपनी राजनीतिक पहचान को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर संगठन को विस्तार देने के लक्ष्य के साथ चुनावी तैयारी कर रही है। विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों के चयन को लेकर भी पार्टी इस बार अलग रणनीति पर काम कर रही है।
इन उम्मीदवारों को प्राथमिकता देगी पार्टी
वहीं आजाद समाज पार्टी नेतृत्व का मानना है कि सिर्फ लोकप्रियता या राजनीतिक पहचान के आधार पर टिकट नहीं दिया जाएगा। पार्टी ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता देना चाहती है जो अपने क्षेत्र में सक्रिय हों और जनता के बीच मजबूत पकड़ रखते हों। इसी वजह से टिकट दावेदारों के लिए इंटरव्यू प्रक्रिया अनिवार्य की गई है, ताकि हर सीट पर गंभीर और सक्रिय उम्मीदवारों का चयन किया जा सके।
दावेदारों का इंटरव्यू लेंगे पार्टी अध्यक्ष
दरअसल आजाद समाज पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन को चुनावी तैयारी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना है। पार्टी अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद खुद दावेदारों का इंटरव्यू लेंगे। इस प्रक्रिया में संबंधित जोन प्रभारी, मंडल प्रभारी, भाईचारा कमेटी के पदाधिकारी और जिलाध्यक्ष भी मौजूद रहेंगे। उम्मीदवारों के बारे में स्थानीय स्तर की रिपोर्ट भी तैयार की जाएगी, जिसके आधार पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक सभी क्षेत्रों के दावेदारों को अलग-अलग दिन बुलाया गया है। इससे पार्टी को हर विधानसभा क्षेत्र की स्थिति समझने और स्थानीय समीकरणों का आकलन करने में मदद मिलेगी।
ये है पार्टी के प्रमुख मुद्दे
दरअसल आसपा ने साफ किया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में शिक्षा, रोजगार, न्यूनतम मजदूरी और सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता दी जाएगी। पार्टी का दावा है कि युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना उसकी प्राथमिकता होगी। इसके अलावा शराबबंदी और मजदूरी बढ़ाने जैसे मुद्दों को भी चुनावी एजेंडे में शामिल किया गया है।






