संसद में महिला आरक्षण बिल पास ना होने के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी राजनीतिक घमासान मच गया है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने 30 अप्रैल 2026 को राज्य विधानमंडल (विधानसभा और विधान परिषद) का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया है। इस सत्र का मुख्य केंद्र बिंदु ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण) रहेगा। इस सत्र के माध्यम से सरकार महिला आरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और विपक्ष के रुख को जनता के सामने लाने की तैयारी में है।
इसके लिए सोमवार (20 अप्रैल 2026) को राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के पास प्रस्ताव भेजा जाएगा। रविवार (19 अप्रैल 2026) को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिए इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है। नियमानुसार सत्र बुलाने के लिए सदस्यों को कम से कम 7 दिन पहले सूचित करना अनिवार्य होता है, इसीलिए 30 अप्रैल की तारीख तय की गई है। इस विशेष सत्र के दौरान सिर्फ महिला आरक्षण प्रस्ताव ही नहीं, बल्कि विपक्ष के रवैये को लेकर निंदा प्रस्ताव भी पेश किया जा सकता है। सत्र की घोषणा होते ही प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है।
दऱअसल, लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल पास ना होने के बाद से भाजपा विपक्षी दलों के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिल को लेकर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए उनके व्यवहार को भरी सभा में द्रौपदी के चीरहरण जैसा बताया था। वहीं समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की ओर से भी इस मुद्दे को लेकर योगी सरकार को घेरने की पूरी तैयारी की जा रही है, ऐसे में यह विशेष सत्र काफी हंगामेदार होने की संभावना है। जानकारों की मानें तो इस विशेष सत्र के जरिए भाजपा महिला मतदाताओं के बीच अपनी पैठ और मजबूत करने की तैयारी में है, ताकी 2027 के यूपी विधानसभा चुनावों में इसका लाभ मिल सके।
गौैरतलब है कि सितंबर 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पास किया गया था, जिसे केंद्र सरकार ने 16 अप्रैल 2026 से आधिकारिक तौर पर लागू (Notify) कर दिया है। इसके बाद सरकार 2023 के कानून में कुछ बदलाव करने के लिए ‘131वां संविधान संशोधन विधेयक 2026’ लाई। इसमें लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था, ताकि महिलाओं को 33% आरक्षण देने के बाद भी पुरुषों की मौजूदा सीटों में कमी न आए। जिस पर17 अप्रैल 2026 को वोटिंग कराई गई। लेकिन दो-तिहाई बहुमत न मिलने के चलते लोकसभा में बिल गिर गया । इसके पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े। संविधान संशोधन के लिए 352+ वोटों (2/3) की जरूरत थी। 54 वोटों की कमी के कारण बिल पास नहीं हो सका। अब महिला आरक्षण पुराने 2023 वाले कानून के हिसाब से ही चलेगा। इस पूरे घटनाक्रम के बाद से ही बीजेपी कांग्रेस और पूरे विपक्ष पर हमलावर है।






