उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल का रविवार को दूसरा विस्तार होने जा रहा है। दरअसल, अगले साल यहां विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इसके पहले भाजपा यहां जातीय एवं क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश कर रही है। वर्तमान में कुल 54 मंत्री हैं और राज्य में अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं।
इसी को देखते हुए कहा जा रहा है कि कुछ मौजूदा राज्य मंत्रियों को कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा। जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए इन 6 पदों को भरा जाएगा। चलिए जान लेते हैं कि मंत्रिमंडल के इस विस्तार में क्या-क्या बदलाव हो सकते हैं।
उत्तरप्रदेश में मंत्री मंडल विस्तार
शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बंगाल में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मिलने के लिए जनभवन पहुंचे। यहां हुई मुलाकात के बाद बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार रविवार दोपहर 3 बजे किया जाना तय किया गया है। इससे ये साफ है कि भाजपा 60 मंत्रियों के अपने इस आंकड़े को आने वाले चुनाव के हिसाब से पूरा करेगी।
इन नामों की हो रही चर्चा
मंत्रिमंडल के विस्तार में जो नाम को मंत्री बनाए जाने की चर्चा हो रही है उसमें राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी से बगावत कर भाजपा प्रत्याशी को वोट देने वाले रायबरेली के मनोज पांडेय और कौशांबी से पूजा पाल का नाम सामने आ रहा है। जाट समाज से आने वाले भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी। फतेहपुर की खागा सीट से विधायक अनुसूचित जाति की कृष्णा पासवान, अति पिछड़ी जाति से आने वाले वाराणसी के विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा। अलीगढ़ के विधायक सुरेंद्र दिलेर के नाम की चर्चा हो रही है।
योगी सरकार के पहले कार्यकाल में ऊर्जा मंत्री रहे मथुरा विधायक श्रीकांत शर्मा और भाजपा के प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ला को भी मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है। वहीं जिन मंत्रियों को राज्य मंत्री से कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। उनमें माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देबी, सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर, समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण, उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह का नाम लिया जा रहा है।
मौजूदा मंत्रिमंडल और जातीय समीकरण
वर्तमान में भाजपा के 258 विधायक हैं। जिनमें से ओबीसी की 84, एससी के 59, 45 राजपूत, 42 ब्राह्मण और अन्य सवर्ण विधायक 28 हैं। वहीं 100 सदस्यों वाले विधान परिषद में भाजपा के 79 सदस्य हैं। जिनमें 26 ओबीसी, 23 राजपूत, 14 ब्राह्मण, 2 मुस्लिम और अन्य सवर्ण 12 और एससी के दो सदस्य हैं।






