कभी गर्भवती महिलाओं के लिए समय पर चिकित्सा सुविधा न मिलना एक बड़ी चुनौती थी, जिससे कई बार उनकी जान को खतरा रहता था। लेकिन अब योगी सरकार की 102 एंबुलेंस सेवा (मदर एंड चाइल्ड सर्विसेस) इन महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं। वर्ष 2015-17 की तुलना में 2021-23 की सर्वे रिपोर्ट में मातृ मृत्यु दर में काफी कमी दर्ज की गई है। योगी सरकार के इन प्रयासों ने मातृ मृत्यु अनुपात को कम करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आज प्रदेश में 102 एंबुलेंस सेवा का रिस्पांस टाइम घटकर मात्र 7 मिनट रह गया है। इसका सीधा अर्थ है कि आपात स्थिति में चिकित्सीय सुविधा सिर्फ सात मिनट में उपलब्ध हो रही है। इस रिस्पांस टाइम के साथ उत्तर प्रदेश पूरे देश में नंबर एक पर है। अपर मुख्य सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य, अमित घोष ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी ने मातृ मृत्यु अनुपात को कम करने के लिए बड़े और निर्णायक कदम उठाए हैं। इसके लिए प्रदेश के शहरी से लेकर ग्रामीण इलाकों तक के अस्पतालों को सुदृढ़ किया गया। साथ ही, 102 एंबुलेंस सेवा के रिस्पांस टाइम को कम करने के लिए विभिन्न पहलुओं पर काम किया गया, जिसके नतीजे आज सबके सामने हैं।
सीएम योगी की दूरदर्शी सोच
सीएम योगी की दूरदर्शी सोच और लगातार मॉनीटरिंग का ही असर है कि वर्तमान में एंबुलेंस सेवा 102 का रिस्पांस टाइम 7:06 मिनट है, जबकि वर्ष 2016 में यह 11:28 मिनट था। यह कमी एक दिन में नहीं आई, बल्कि सीएम योगी के विगत नौ वर्षों में लगातार किए गए प्रयासों और पहलों का परिणाम है। इस लक्ष्य को पाने के लिए सीएम योगी ने 2019 में 1,554 और 2023 में 674 खटारा हो चुकी एंबुलेंस को हटाकर नई स्वास्थ्य तकनीक से लैस एंबुलेंस की खरीद की। इसके अतिरिक्त, सेवा को और बेहतर बनाने के लिए 306 अतिरिक्त नई एंबुलेंस जोड़ी गईं। वर्तमान में प्रदेश में कुल 2,270 एंबुलेंस सेवा 102 संचालित हैं, जिनके माध्यम से औसतन रोजाना 40,524 जच्चा-बच्चा को सहायता प्रदान की जा रही है।
102 एंबुलेंस सेवा के रिस्पांस टाइम में कमी
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि 102 एंबुलेंस सेवा के रिस्पांस टाइम में कमी आने से प्रदेश में मातृ मृत्यु अनुपात में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे (एसआरएस) के अनुसार, वर्ष 2015-17 में प्रदेश की मातृ मृत्यु अनुपात 216 प्रति लाख दर्ज की गई थी, जो कम होकर वर्ष 2021-23 में 141 प्रति लाख पहुंच गई है। यह सीएम योगी के अथक प्रयासों का ही नतीजा है कि साल दर साल एंबुलेंस सेवा का रिस्पांस टाइम बेहतर होता गया। उन्होंने बताया कि एंबुलेंस सेवा 102 का रिस्पांस टाइम वर्ष 2016 में 11:28 मि., वर्ष 2017 में 12:01 मि. और वर्ष 2018 में 11:21 मि. दर्ज किया गया। वहीं, वैश्विक कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2020 में 13:42 मि. और वर्ष 2021 में 12:02 मि. रिस्पांस टाइम दर्ज हुआ। इसके बाद, वर्ष 2022 में 7:01 मिनट और वर्ष 2023 में 7:02 मिनट का प्रभावशाली रिस्पांस टाइम हासिल किया गया।
वर्तमान में रिस्पांस टाइम 7:06 मिनट
वर्तमान में रिस्पांस टाइम 7:06 मिनट है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूरे देश में एंबुलेंस सेवा का सबसे कम रिस्पांस टाइम उत्तर प्रदेश का ही है, जबकि उत्तर प्रदेश देश भर में सबसे अधिक 25.74 करोड़ जनसंख्या वाला राज्य है। उत्तर प्रदेश एंबुलेंस सेवा के 7:06 मिनट के रिस्पांस टाइम के साथ देशभर में पहले स्थान पर है, जबकि दूसरे स्थान पर 7:57 मिनट के साथ राजस्थान और तीसरे स्थान पर 10:45 मिनट के साथ केरल है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि योगी सरकार की प्रतिबद्धता और प्रभावी नीतियों ने कैसे लाखों माताओं और शिशुओं के जीवन को सुरक्षित किया है।






