कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अभिनेता राज बब्बर को बुधवार को एक बड़ी कानूनी राहत मिली। लखनऊ की एमपी/एमएलए कोर्ट ने उन्हें 1996 के लोकसभा चुनाव के दौरान एक मतदान अधिकारी के साथ मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोपों से बरी कर दिया है। यह फैसला उस मामले में आया है, जिसमें एक निचली अदालत ने उन्हें दो साल की सजा सुनाई थी।
फैसले के बाद राज बब्बर ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उन्हें देश के संविधान और लोकतंत्र पर पूरा भरोसा है। उन्होंने इसे न्याय की जीत बताया।
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“मैं देश के लोकतंत्र और संविधान में आस्था रखता हूं। मैं संविधान, लोकतंत्र की रक्षा और जनता के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करता रहूंगा।” — राज बब्बर, वरिष्ठ कांग्रेस नेता
क्या था 30 साल पुराना यह मामला?
यह मामला साल 1996 के लोकसभा चुनाव का है। उस वक्त पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी लखनऊ लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार थे। समाजवादी पार्टी ने उनके खिलाफ अभिनेता राज बब्बर को मैदान में उतारा था।
मतदान के दिन, वजीरगंज थाना क्षेत्र के एक मतदान केंद्र पर फर्जी वोटिंग को लेकर राज बब्बर की वहां तैनात चुनाव अधिकारी से बहस और झड़प हो गई थी। इसके बाद, चुनाव अधिकारी ने राज बब्बर और उनके समर्थकों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने, मारपीट करने और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था।
निचली अदालत ने सुनाई थी 2 साल की सजा
इस मामले की सुनवाई लखनऊ की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट में चल रही थी। 7 जुलाई, 2022 को विशेष अदालत ने राज बब्बर को इस मामले में दोषी ठहराते हुए 2 साल की कैद और 8,500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ राज बब्बर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में अपील की थी। हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगा दी थी, जिससे उन्हें चुनाव लड़ने की राहत तो मिल गई थी, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ था। बुधवार को एमपी/एमएलए कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया।
‘राजनीतिक दुर्भावना से दर्ज कराई गई थी FIR’
बरी होने के बाद राज बब्बर ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। उन्होंने कहा, “उस समय के राजनीतिक माहौल में लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने के उद्देश्य से मुझ पर इस प्रकार की कार्रवाइयां की गईं। ये बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण थीं। मैं कांग्रेस पार्टी का सिपाही हूं।” वहीं, कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे सत्य की जीत बताया और कहा कि राज बब्बर को उनकी बढ़ती लोकप्रियता के कारण झूठे मामले में फंसाया गया था।