जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए अहम प्रशासनिक बाधा हट गई है। भारत के नागरिक उड्डयन नियामक DGCA ने एयरपोर्ट को एयरोड्रम लाइसेंस जारी कर दिया है, जिसे किसी भी हवाई अड्डे के नियमित संचालन के लिए अनिवार्य माना जाता है।
इस लाइसेंस का सीधा अर्थ यह है कि एयरपोर्ट का बुनियादी ढांचा, सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी सिस्टम उड़ान संचालन के निर्धारित मानकों पर परखे जा चुके हैं। इसी वजह से अब परिचालन शुरू करने की दिशा में अगली प्रक्रियाओं को तेजी मिलने की संभावना जताई जा रही है।
संचालन की तैयारी अब अंतिम चरण में
एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद अधिकारियों के स्तर पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की शुरुआत से जुड़ी तैयारियां तेज होने की बात कही जा रही है। औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होते ही यहां से यात्री सेवाओं का रास्ता खुल सकता है।
इस विकास का असर केवल जेवर या गौतमबुद्ध नगर तक सीमित नहीं रहेगा। दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते हवाई यातायात के बीच इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर दबाव कम करने के विकल्प के तौर पर भी इस एयरपोर्ट को देखा जा रहा है।
NIAL और YIAPL के लिए बड़ा मील का पत्थर
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (NIAL) और यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (YIAPL) के लिए यह मंजूरी परियोजना की प्रगति का महत्वपूर्ण चरण मानी जा रही है। लंबे समय से चल रही निर्माण और नियामकीय प्रक्रिया में एयरोड्रम लाइसेंस वह बिंदु है, जिसके बाद व्यावसायिक संचालन की दिशा स्पष्ट होती है।
एयरपोर्ट को बहु-चरणीय मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। पहले चरण में ही बड़ी संख्या में यात्रियों को सेवा देने की क्षमता तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि आगे विस्तार के साथ यात्री क्षमता और सुविधाओं में वृद्धि की योजना है।
NCR और पश्चिमी यूपी के यात्रियों को क्या लाभ
नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़ और आसपास के जिलों के लिए यह परियोजना परिवहन के लिहाज से बड़ा बदलाव ला सकती है। अभी बड़ी संख्या में यात्रियों को दिल्ली एयरपोर्ट तक पहुंचने में अतिरिक्त समय और दूरी लगती है। जेवर से उड़ानें शुरू होने पर यह निर्भरता घटने की उम्मीद है।
यात्रा सुविधा के साथ-साथ क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर जुड़ा हुआ है। एयरपोर्ट के आसपास औद्योगिक गतिविधियां, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और सेवा क्षेत्र के विस्तार की संभावना पहले से व्यक्त की जाती रही है। ऐसे में रोजगार सृजन और निवेश आकर्षण को नई गति मिल सकती है।
आर्थिक केंद्र के रूप में उभरने की तैयारी
यह परियोजना केवल एक यात्री टर्मिनल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे बड़े क्षेत्रीय विकास ढांचे के हिस्से के तौर पर तैयार किया जा रहा है। एयर कनेक्टिविटी बढ़ने से पर्यटन, व्यापारिक आवाजाही और सप्लाई चेन दक्षता पर सकारात्मक प्रभाव की उम्मीद की जा रही है।
फिलहाल सबसे बड़ा संकेत यही है कि नियामकीय स्तर पर एक बड़ी मंजूरी मिल चुकी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि परिचालन संबंधी शेष प्रक्रियाएं कितनी तेजी से पूरी होती हैं और जेवर से नियमित उड़ानों का कैलेंडर कब घोषित किया जाता है।





