अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री शुक्रवार को वाराणसी पहुंचे। काशी की धरती पर कदम रखते ही उन्होंने इसे अविनाशी और दिव्य बताया। हालांकि, जब मीडिया ने उनसे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ चल रही बयानबाजी को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने बेहद सधा हुआ रुख अपनाते हुए इस पर कुछ भी कहने से साफ मना कर दिया।
यह पहली बार नहीं है जब धीरेंद्र शास्त्री काशी आए हैं, लेकिन इस बार उनका अंदाज काफी बदला हुआ नजर आया। उन्होंने कहा कि महादेव और काशी विश्वनाथ की यह धरती अद्भुत है और यहां आना हमेशा एक अलग आध्यात्मिक अनुभव देता है। उन्होंने इसे अपना सौभाग्य बताया कि उन्हें बार-बार इस पावन भूमि पर आने का अवसर मिलता है।
शंकराचार्य पर टिप्पणी हमारी क्षमता में नहीं
विगत कुछ समय से ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और धीरेंद्र शास्त्री के बीच कुछ मुद्दों को लेकर वैचारिक मतभेद और तल्ख बयानबाजी देखने को मिल रही थी। इसी पृष्ठभूमि में जब पत्रकारों ने धीरेंद्र शास्त्री से शंकराचार्य पर सवाल पूछा तो उन्होंने हाथ जोड़ लिए।
“हम किसी भी संत या आध्यात्मिक गुरु पर टिप्पणी नहीं करते, क्योंकि यह हमारे दायरे से बाहर की बात है। ऐसे महान संत और आध्यात्मिक व्यक्तित्वों पर बोलने की हमारी कोई व्यक्तिगत क्षमता नहीं है।” — पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री
उनके इस बयान को दोनों के बीच चल रही तनातनी पर विराम लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस विषय पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते।
सनातन, गौ और गंगा की रक्षा का संकल्प
विवादित सवालों से बचते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने सनातन धर्म के मूल कर्तव्यों पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “गौ रक्षा, सनातन धर्म की रक्षा और मां गंगा की रक्षा, ये बहुत ही अद्भुत संकल्प हैं।” उन्होंने आगे कहा कि भारत के हर सनातनी को यह संकल्प लेना चाहिए और इसके लिए मजबूती से खड़ा रहना चाहिए।
इसके अतिरिक्त, जब उनसे भारत के टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंचने पर सवाल किया गया, तो उन्होंने पूरे देश को बधाई दी। उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान विश्वनाथ और बागेश्वर बालाजी का आशीर्वाद उन पर बना रहे। उन्होंने इसे देश की हर क्षेत्र में हो रही तरक्की का प्रतीक बताया।






