नोएडा में राफे एमफाइबर प्राइवेट लिमिटेड के रक्षा उपकरण और इंजन परीक्षण केंद्र के उद्घाटन के अवसर पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने ड्रोन को आधुनिक युद्ध रणनीति का अभिन्न अंग बताया। उन्होंने कहा कि परंपरागत रूप से ‘एयरक्राफ्ट’ शब्द सुनते ही तेजस और राफेल जैसे लड़ाकू विमानों की छवि उभरती है, लेकिन वर्तमान समय में ड्रोन युद्धक्षेत्र में एक महत्वपूर्ण शक्ति बनकर उभरे हैं। सिंह ने जोर देकर कहा कि ड्रोन अब उन क्षेत्रों में भी तैनात किए जा रहे हैं, जहां बड़े उपकरणों की पहुंच सीमित है।
रक्षामंत्री ने रूस-यूक्रेन संघर्ष का उदाहरण देते हुए ड्रोन के व्यापक उपयोग को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष में ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ है, जो उनकी रणनीतिक उपयोगिता को दर्शाता है। सिंह ने बताया कि शुरुआत में ड्रोन का उपयोग केवल निगरानी और टोह लेने के लिए होता था, लेकिन अब कई देशों ने लड़ाकू ड्रोन विकसित किए हैं और इनका उपयोग सीमा संघर्षों में किया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ड्रोन तकनीक को युद्ध नीति में शामिल करना अब अनिवार्य हो गया है।
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भारत में डिजाइन, विकास और निर्माण
राजनाथ सिंह ने कहा कि ड्रोन तकनीक में निवेश करने वाले देशों ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, जबकि अन्य देश पिछड़ गए हैं। अपने रक्षा मंत्री के रूप में साढ़े छह साल के अनुभव के आधार पर उन्होंने बताया कि वर्तमान रक्षा क्षेत्र की वास्तविकता विमान प्रौद्योगिकी और ड्रोन पर निर्भर है। उन्होंने भारत की प्रगति पर गर्व जताते हुए कहा कि जहां पहले ड्रोन आयात किए जाते थे, वहीं अब भारत में इनका डिजाइन, विकास और निर्माण हो रहा है।
भारत ड्रोन तकनीक में आत्मनिर्भर
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित थे। सिंह ने देश के उद्यमियों की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों ने भारत को ड्रोन तकनीक में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत इस क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है और वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति को मजबूत कर रहा है।