होली के दौरान संभावित दुर्घटनाओं, आंख और त्वचा से जुड़ी समस्याओं तथा आकस्मिक मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रदेश का स्वास्थ्य तंत्र अलर्ट मोड में रखा गया है। शासन स्तर से जारी निर्देशों में बुलंदशहर समेत सभी जिलों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी भी चिकित्सीय इकाई में आपात सेवाएं बाधित नहीं होनी चाहिए।
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी अमित कुमार घोष ने प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में व्यवस्थाएं केवल कागजों पर नहीं, बल्कि पूरी तरह क्रियाशील स्थिति में रहें। उन्होंने यह भी कहा है कि चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ का अवकाश बिना अपरिहार्य कारण स्वीकृत न किया जाए, ताकि त्योहार के दिनों में ड्यूटी पर पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध रहे।
दवाइयों और इमरजेंसी सामग्री की अनिवार्य उपलब्धता
निर्देशों में आवश्यक औषधियों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। पैरासीटामोल, एंटी-डायरियल दवाएं, एंटी-इमेटिक दवाएं, एआरवी और एएसवी जैसी दवाओं के साथ एंटीबायोटिक मरहम, दर्द निवारक मरहम और स्प्रे, बैंडेज, स्प्लिंट, आईवी फ्लूड्स और ओआरएस पैकेट पर्याप्त मात्रा में रखने को कहा गया है। इसका उद्देश्य यह है कि रंगों, फिसलन, सड़क दुर्घटनाओं या अन्य आकस्मिक स्थितियों में आने वाले मरीजों का तत्काल उपचार शुरू किया जा सके।
शासन ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि केवल दवा स्टॉक ही नहीं, बल्कि जांच और उपचार से जुड़ा पूरा सिस्टम सक्रिय रहे। यानी इमरजेंसी वार्ड में तैनाती, जांच सामग्री, रीजेंट्स और सपोर्ट स्टाफ-सभी की उपलब्धता पहले से सत्यापित हो।
ऑक्सीजन, उपकरण और एंबुलेंस पर विशेष फोकस
होली अवधि में अस्पतालों को ऑक्सीजन आपूर्ति तंत्र पूरी तरह कार्यशील रखने के निर्देश दिए गए हैं। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और ऑक्सीजन सिलेंडर दोनों की कार्यक्षमता जांचने को कहा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर किसी तरह की देरी न हो। इसके साथ ही एक्स-रे मशीन, सीटी स्कैन, पैथोलॉजी और अन्य जरूरी उपकरणों को 24 घंटे मानक के अनुसार चालू रखने के निर्देश जारी किए गए हैं। एंबुलेंस सेवाओं को भी समान रूप से सक्रिय और तत्पर रखने को कहा गया है।
जिला प्रशासन के साथ समन्वय को भी इस योजना का अहम हिस्सा बनाया गया है। किसी दुर्घटना या सामूहिक आपात स्थिति में तत्काल जिला प्रशासन को अलर्ट करने और उच्चाधिकारियों को सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि चिकित्सा प्रतिक्रिया समय कम किया जा सके।
“सभी सीएचसी और पीएचसी पर शासन के निर्देशानुसार व्यवस्था करा दी गई है।”- डॉ. सुनील कुमार दोहरे, सीएमओ
रोस्टर, विशेषज्ञ तैनाती और बुनियादी सुविधाओं के निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने सभी चिकित्सा इकाइयों में चिकित्सकों, विशेषज्ञ चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ का रोस्टर बनाकर ड्यूटी सुनिश्चित करने को कहा है। त्योहार के दौरान सबसे ज्यादा शिकायतें आंख और त्वचा से संबंधित आती हैं, इसलिए नेत्र एवं त्वचा रोग की दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता रखने और इन दोनों विभागों के विशेषज्ञों की ड्यूटी सूची अलग से तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
अस्पतालों में साफ-सफाई, 24 घंटे बिजली आपूर्ति और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता को भी अनिवार्य बिंदु बनाया गया है। प्रशासन का मानना है कि त्योहार के समय मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ बुनियादी सुविधाओं पर दबाव बढ़ता है, इसलिए इन व्यवस्थाओं को पहले से स्थिर रखना जरूरी है।
कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय मिश्रा ने जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल में व्यवस्था दुरुस्त रखने को कहा है। स्थानीय स्तर पर सीएमओ कार्यालय ने भी बताया कि ब्लॉक स्तर की इकाइयों तक निर्देश लागू करा दिए गए हैं। कुल मिलाकर, होली के दौरान चिकित्सा प्रतिक्रिया प्रणाली को बिना रुकावट चलाने पर पूरा फोकस रखा गया है, ताकि आकस्मिक स्थिति में मरीजों को तत्काल इलाज मिल सके।






