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उत्तर प्रदेश: बिजली दरों में बढ़ोतरी पर अखिलेश यादव का बड़ा हमला, भाजपा सरकार को बताया गरीब और किसान विरोधी, लगाए गंभीर आरोप

Written by:Gaurav Sharma
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प्रदेश में बिजली के लगातार बढ़ते दामों ने जनता की कमर तोड़ दी है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे भाजपा के चुनावी खर्चों का जुगाड़ बताया है, जिससे निराश लोग आत्मदाह को मजबूर हो रहे हैं।
उत्तर प्रदेश: बिजली दरों में बढ़ोतरी पर अखिलेश यादव का बड़ा हमला, भाजपा सरकार को बताया गरीब और किसान विरोधी, लगाए गंभीर आरोप

प्रदेश में महंगाई की मार झेल रही आम जनता पर अब बिजली के बढ़ते दाम एक और बड़ा बोझ बनकर सामने आए हैं, जिस पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। अखिलेश यादव ने स्पष्ट शब्दों में आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी 2027 के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपने तिकड़मी खर्चों की व्यवस्था करने हेतु बिजली के बिलों पर अधिभार (सरचार्ज) लगाकर जनता की जेब काट रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार जिस तरह से महंगाई को लगातार बढ़ा रही है, वह सीधे तौर पर जनता पर आर्थिक बोझ डाल रही है। यह प्रतिदिन बढ़ती महंगाई आम आदमी के जीवन को और भी दूभर बना रही है, जिससे लोग त्रस्त हैं।

सपा अध्यक्ष ने अपने जारी बयान में यह भी कहा कि भाजपा सरकार कभी डीजल, कभी पेट्रोल, तो कभी बिजली और गैस सिलेंडर के दामों में लगातार वृद्धि कर रही है। उन्होंने भाजपा को गरीब और किसान विरोधी करार दिया। अखिलेश यादव ने दावा किया कि प्रदेश की जनता इस महंगाई और सरकार की नीतियों से इतनी परेशान हो चुकी है कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से हटाकर समाजवादी पार्टी की सरकार बनाएगी। उनका मानना है कि तभी प्रदेश की जनता को इस बेलगाम महंगाई से वास्तविक निजात मिल सकेगी।

आम लोगों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा: अखिलेश

इतना ही नहीं, अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से भी अपनी बात रखते हुए कहा कि भाजपा सरकार के प्रति जनता में निराशा का स्तर इतना अधिक बढ़ गया है कि नाउम्मीद होकर पीड़ित लोग अब आत्मदाह जैसे गंभीर कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। यह स्थिति बेहद चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है, जो सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाती है। उन्होंने भाजपा के सत्ता के अहंकार पर भी सवाल उठाए और कहा कि यह अहंकार उन्हें इतना संवेदनहीन बना चुका है कि उन्हें किसी की पुकार, गुहार या चीत्कार तक सुनाई नहीं देती है। सपा अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आवास के ठीक सामने अपनी रोजी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे रोडवेज संविदाकर्मियों द्वारा आत्मदाह करने के प्रयास को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह की घटनाएं प्रदेश में व्याप्त गहरी निराशा और सरकार के प्रति जनता के बढ़ते अविश्वास का प्रतीक हैं। यह दर्शाता है कि आम लोगों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma
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