वाराणसी न्यायालय परिसर के विस्तारीकरण का विषय इन दिनों सुर्खियों में है। दरअसल इस मुद्दे पर अब अधिवक्ताओं के दो प्रमुख संगठन आमने-सामने आ गए हैं, जिससे स्थिति और भी जटिल हो गई है। सेंट्रल बार एसोसिएशन ने कचहरी स्थित वर्तमान न्यायालय परिसर को शिवपुर स्थित सेंट्रल जेल के पास स्थानांतरित करने के प्रस्ताव का स्वागत किया है। वहीं इसके विपरीत, बनारस बार एसोसिएशन इस प्रस्ताव के खिलाफ खड़ा हो गया है।
दरअसल उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद का न्यायालय परिसर न्यायिक सुनवाई और विधिक कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। बीते कई महीनों से वाराणसी न्यायालय परिसर के विस्तारीकरण का मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। अब इस मामले को लेकर न्यायालय परिसर में ही अधिवक्ताओं के दो बार एसोसिएशनों के बीच गहरा मतभेद उत्पन्न हो गया है।
बार एसोसिएशन ने किया प्रदर्शन करना आरंभ
वहीं सेंट्रल बार एसोसिएशन ने वाराणसी के कचहरी स्थित न्यायालय परिसर को शिवपुर स्थित सेंट्रल जेल के पास बनाए जाने वाले प्रस्ताव को स्वीकार किया है। वहीं, बनारस बार एसोसिएशन ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए बनारस के अलग-अलग स्थानों पर जाकर प्रदर्शन करना आरंभ कर दिया है। सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम प्रकाश गौतम ने बताया कि न्यायपालिका और शासन की ओर से वाराणसी के कचहरी स्थित न्यायालय परिसर के विस्तारीकरण का प्रस्ताव सभी अधिवक्ताओं के समक्ष रखा गया है, और वे इसका स्वागत करते हैं। गौतम के अनुसार, यह एक शानदार अवसर है। उन्होंने बताया कि वर्तमान परिसर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर एक नया न्यायालय परिसर बनाया जाएगा, जिसमें सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
नया परिसर अगले तीन वर्षों में बनकर तैयार हो जाएगा
गौतम ने जानकारी दी कि नए परिसर में लाइब्रेरी, अधिवक्ताओं के बैठने की समुचित सुविधा, अलग-अलग कोर्ट रूम और अधिवक्ताओं के वाहनों के लिए स्टैंड जैसी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं होंगी। उनके मुताबिक, यह नया परिसर अगले तीन वर्षों में बनकर तैयार हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया जाता है, तो भविष्य में न्यायालय परिसर को और भी अधिक दूर बनाए जाने का प्रस्ताव आ सकता है। गौतम ने विरोध करने वालों पर भ्रम में रहने और दूसरों को भी भ्रमित करने का आरोप लगाया।
बार एसोसिएशन की ओर से विरोध किया जा रहा
वहीं दूसरी ओर, इस परियोजना का बनारस बार एसोसिएशन की ओर से पुरजोर विरोध किया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन न केवल न्यायालय परिसर में, बल्कि वाराणसी जनपद के विभिन्न स्थानों पर हस्ताक्षर अभियान के रूप में भी चलाया जा रहा है। बनारस बार के अध्यक्ष विनोद शुक्ला का इस मामले पर कहना है कि ऐसे किसी विषय पर राजनीतिक मंशा के तहत चर्चा की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सच्चाई यह है कि न तो न्यायपालिका और न ही शासन की ओर से वाराणसी कचहरी के लिए ऐसा कोई आधिकारिक प्रस्ताव लाया गया है।
क्यों किया जा रहा इसका विरोध?
दरअसल शुक्ला ने आगे कहा कि कचहरी वर्तमान समय में एक ऐसे केंद्रीय स्थान पर स्थित है, जहां से अधिकांश अधिवक्ताओं को परिसर तक पहुंचने में सुलभता होती है। उन्होंने बताया कि सभी कोर्ट रूम यहीं पर स्थित हैं। उनके अनुसार, यदि वर्तमान स्थान के बदले किसी दूसरे जगह पर न्यायालय परिसर का निर्माण होता है, तो वह अधिवक्ता हित में नहीं होगा और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। शुक्ला ने सुझाव दिया कि यदि न्यायालय का विस्तार करना ही है, तो वर्तमान न्यायालय परिसर के ठीक बगल में एक परिसर उपलब्ध है, उस पर विचार किया जाना चाहिए।






