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इंदौर में सराफा चौपाटी को लेकर छिड़ा विवाद, दुकान आवंटन मामले में हाईकोर्ट पहुंचे पुराने व्यापारी, जानिए क्या है पूरा मामला?

Written by:Ankita Chourdia
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इंदौर की मशहूर सराफा चौपाटी में दुकानों के आवंटन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल पुराने व्यापारियों ने हाईकोर्ट में इस मामले में गुहार लगाई है। जानिए क्या है पूरा मामला?
इंदौर में सराफा चौपाटी को लेकर छिड़ा विवाद, दुकान आवंटन मामले में हाईकोर्ट पहुंचे पुराने व्यापारी, जानिए क्या है पूरा मामला?

इंदौर की मशहूर सराफा चौपाटी में दुकानों के आवंटन को लेकर इन दिनों भारी विवाद छिड़ा हुआ है। दरअसल यह मामला अब केवल व्यापारियों के बीच का नहीं रहा, बल्कि हाईकोर्ट की चौखट तक जा पहुंचा है, जहां सालों से व्यवसाय कर रहे पुराने दुकानदार न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। वहीं शहर की इस प्रसिद्ध चौपाटी में दुकान वितरण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जिसमें सराफा चौपाटी एसोसिएशन के अध्यक्ष राम गुप्ता पर पक्षपात और अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।

दरअसल पीड़ित व्यापारियों का कहना है कि वर्षों से सराफा चौपाटी में अपनी आजीविका चला रहे पात्र और वास्तविक लोगों की जानबूझकर अनदेखी की गई है। उनकी जगह ऐसे लोगों को लाभ पहुंचाया गया है, जिनका सराफा से कोई पुराना जुड़ाव नहीं है। यह आरोप आवंटन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। व्यापारियों के अनुसार, नगर निगम को सौंपी गई पात्रता सूची में कई पुराने और अनुभवी व्यापारियों के नाम शामिल ही नहीं किए गए। इसके विपरीत, उनकी जगह अन्य लोगों के नाम जोड़ दिए गए, जिससे पुराने दुकानदारों में गहरा असंतोष है।

ठोस सबूतों के बावजूद, दुकान आवंटन की प्रक्रिया से बाहर रखा गया

वहीं व्यापारियों ने दावा किया है कि सराफा चौपाटी में 20 से 40 वर्षों से व्यवसाय कर रहे कई परिवारों के पास नगर निगम द्वारा जारी पुराने लाइसेंस और अन्य आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं। इन ठोस सबूतों के बावजूद, उन्हें दुकान आवंटन की प्रक्रिया से बाहर रखा गया, जो सरासर नाइंसाफी है। उनका आरोप है कि पूरी आवंटन प्रक्रिया ही पारदर्शी नहीं रही और सूची में शामिल नामों में बाद में बदलाव किए गए। व्यापारियों का कहना है कि प्रारंभिक सूची में जिन लोगों के नाम शामिल थे, उन्हें अंतिम सूची से रहस्यमय तरीके से हटा दिया गया, जिससे उनकी नाराजगी और भी बढ़ गई है।

व्यापारियों ने इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की

दरअसल इस पूरे मामले में आठ व्यापारियों ने इंदौर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर सराफा चौपाटी एसोसिएशन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि पात्र व्यापारियों को न्याय दिलाया जाए और पूरी आवंटन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका मानना है कि अदालत ही उन्हें इस अन्याय से मुक्ति दिला सकती है।

व्यापारियों ने यह भी बताया कि उन्होंने अपनी शिकायतों को लेकर मेयर, मंत्री, नगर निगम कमिश्रर और कलेक्टर सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को कई बार ज्ञापन सौंपे थे। लेकिन, कहीं से भी कोई संतोषजनक समाधान नहीं मिलने के बाद, उन्हें मजबूरन न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। एक उदाहरण देते हुए, व्यापारियों ने बताया कि कुछ लोगों के नाम प्रारंभिक सूची में स्पष्ट रूप से दर्ज थे, लेकिन अंतिम सूची से उन्हें हटा दिया गया। वहीं, कई ऐसे लोग भी हैं जो लंबे समय से सराफा क्षेत्र में अपनी आजीविका चला रहे हैं, लेकिन उन्हें ‘व्यापारी’ की श्रेणी में ही शामिल नहीं किया गया, जिससे उनकी नाराजगी और भी ज्यादा बढ़ गई है।

वहीं अब पीड़ित व्यापारियों ने मुख्यमंत्री से भी इस पूरे मामले में हस्तक्षेप की मांग करने की तैयारी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि यदि इस आवंटन प्रक्रिया की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो इससे जुड़े कई अनछुए तथ्य और अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। व्यापारियों की मुख्य मांग है कि पूरी सूची की पुनः समीक्षा की जाए और वास्तविक तथा वर्षों से सराफा चौपाटी में व्यवसाय कर रहे पात्र व्यापारियों को प्राथमिकता के आधार पर दुकानें आवंटित की जाएं, ताकि उन्हें उनका हक मिल सके और इस ऐतिहासिक चौपाटी की गरिमा बनी रहे।

Ankita Chourdia
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