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सोमवती अमावस्या 2026: ये 5 उपाय बदल सकते हैं आपकी किस्मत, मिलेगा शिव-पितरों का आशीर्वाद

Written by:Bhawna Choubey
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सोमवती अमावस्या हिंदू धर्म में बेहद खास मानी जाती है। इस बार ज्येष्ठ मास की सोमवती अमावस्या 14 और 15 जून को पड़ रही है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा, दान-पुण्य और पितरों का स्मरण करने से जीवन में सुख-शांति आती है। 
सोमवती अमावस्या 2026: ये 5 उपाय बदल सकते हैं आपकी किस्मत, मिलेगा शिव-पितरों का आशीर्वाद

ज्येष्ठ मास की सोमवती अमावस्या को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 14 जून दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से शुरू होकर 15 जून सुबह 8 बजकर 23 मिनट तक रहेगी। धार्मिक परंपराओं में इस दिन स्नान, पूजा, व्रत और दान का विशेष महत्व बताया गया है। खास बात यह है कि जब अमावस्या सोमवार को पड़ती है तो उसका महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि यह दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है।

धार्मिक जानकारों के अनुसार सोमवती अमावस्या केवल पूजा-पाठ का दिन नहीं है, बल्कि आत्मचिंतन, दान और पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का भी अवसर माना जाता है। इसी वजह से देशभर के शिव मंदिरों और पवित्र नदी घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

शिव कृपा पाने के लिए करें ये आसान काम

सोमवती अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद भगवान शिव की पूजा करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करने से मन की इच्छाएं पूरी होने की कामना की जाती है। कई श्रद्धालु इस दिन सवा किलो चावल मंदिर में चढ़ाकर बाद में जरूरतमंद लोगों को दान भी करते हैं।

इसके अलावा सूर्योदय के समय सूर्य देव को जल अर्पित करना भी लाभकारी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे नकारात्मकता कम होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जो लोग मानसिक तनाव या पारिवारिक परेशानियों से जूझ रहे हैं, वे इस दिन रुद्राभिषेक या शिव मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं। वहीं कुंडली में चंद्रमा से जुड़ी समस्याओं के लिए गाय को चावल या दही खिलाने की परंपरा भी कई स्थानों पर निभाई जाती है।

पितृ दोष से राहत के लिए करें दान और तर्पण

सोमवती अमावस्या को पितरों के स्मरण का भी विशेष दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यही कारण है कि कई लोग इस अवसर पर नदी या सरोवर में स्नान कर जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और अन्य उपयोगी वस्तुएं दान करते हैं।

शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने और पितरों का स्मरण करने की परंपरा भी काफी प्रचलित है। इसके अलावा गाय, कौआ और चींटियों के लिए भोजन की व्यवस्था करना भी पुण्यकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक ऐसे कार्य परिवार में सुख-शांति और सकारात्मक वातावरण बनाए रखने में सहायक माने जाते हैं।

धार्मिक विशेषज्ञों का कहना है कि इन उपायों को श्रद्धा और सच्चे मन से करना अधिक महत्वपूर्ण है। हालांकि इन मान्यताओं का आधार आस्था और परंपरा है, इसलिए इन्हें व्यक्तिगत विश्वास के रूप में देखा जाना चाहिए। सोमवती अमावस्या का यह अवसर लोगों को धर्म, दान और परिवार की परंपराओं से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करता है।

Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News न्यूज़ नहीं करता।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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