आज ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा मनाई जा रही है, जिसे धार्मिक परंपराओं में विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान, जप और पूजा का फल सामान्य दिनों की तुलना में अधिक मिलता है। रविवार होने के कारण सूर्य देव की उपासना का महत्व भी बढ़ गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। ऐसे में पूर्णिमा तिथि पर स्नान, दान और पूजा-पाठ करने वाले श्रद्धालु विशेष अनुष्ठान करते हैं। इस बार पूर्णिमा के साथ सिद्ध योग का संयोग भी इसे और खास बना रहा है।
अधिक मास पूर्णिमा का महत्व और स्नान-दान की परंपरा
हिंदू धर्म में अधिक मास की पूर्णिमा को विशेष पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान या घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करने से मन और शरीर दोनों को शुद्धता का अनुभव होता है। इसके साथ ही जरूरतमंद लोगों को जल, सत्तू, फल, शर्बत या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है।
धार्मिक जानकारों के अनुसार गर्मी के मौसम में जल से जुड़ी वस्तुओं का दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। यही कारण है कि ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा पर मिट्टी का घड़ा, ठंडे पेय पदार्थ और मौसमी फल दान करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। माना जाता है कि इससे घर में सुख-शांति और सकारात्मक वातावरण बना रहता है। इस दिन कई लोग भगवान विष्णु की पूजा कर परिवार की खुशहाली और तरक्की की कामना भी करते हैं।
सिद्ध योग और सूर्य पूजा से जुड़ी खास मान्यताएं
इस वर्ष पूर्णिमा के साथ सिद्ध योग का संयोग भी बना है, जिसे शुभ कार्यों के लिए अच्छा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सूर्य देव को जल अर्पित करने और भगवान विष्णु का स्मरण करने से आत्मविश्वास, ऊर्जा और मानसिक शांति मिलती है।
विशेषज्ञों के अनुसार रविवार के दिन सूर्य पूजा का महत्व पहले से ही अधिक होता है। ऐसे में पूर्णिमा और सिद्ध योग का मेल इसे और खास बना देता है। श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद तांबे के पात्र से सूर्य को अर्घ्य देते हैं और घर में दीपक जलाकर पूजा करते हैं।
मान्यता है कि इस दिन किए गए अच्छे कार्य, दान और प्रार्थना व्यक्ति को सकारात्मक सोच की ओर प्रेरित करते हैं। हालांकि धार्मिक मान्यताएं व्यक्ति की आस्था पर आधारित होती हैं, लेकिन पूर्णिमा जैसे पर्व लोगों को सेवा, दान और आध्यात्मिक चिंतन का अवसर जरूर प्रदान करते हैं। यही वजह है कि अधिक मास पूर्णिमा को साल के महत्वपूर्ण धार्मिक अवसरों में गिना जाता है।
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