ज्योतिष में हर पूर्णिमा का विशेष महत्व बताया गया है। अधिक मास में आने वाली पूर्णिमा और भी खास हो जाते हैं। इन दिनों ज्येष्ठ अधिकमास चल रहा है और पूर्णिमा की तिथि को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति देखने को मिल रही है। कुछ लोगों का कहना है कि यह 30 तारीख को है तो कुछ इसे 31 मई को बता रहे हैं।
अगर पंचांग के हिसाब से देखें तो पूर्णिमा तिथि 2 दिन पड़ रही है इसी वजह से लोगों में असमंजस बना हुआ है। अधिक मास जिसे पुरुषोत्तम मास के नाम से पहचाना जाता है यह बहुत ही पवित्र महीना है। इस महीने में की गई भगवान विष्णु की पूजा, जप, तप और दान कई गुना अधिक फल देता है। वहीं जब बात पूर्णिमा की हो तो ये महत्व और भी बढ़ जाता है। चलिए आपको सही तिथि की जानकारी देते हैं।
कब है ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा
ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा तिथि 30 मई को सुबह 11 बजकर 57 मिनट पर शुरू होगी। ये 31 मई को दोपहर 2 बजकर 14 मिनट तक रहेगी। यानी कि पूर्णिमा दो दिन है लेकिन इसे उदया तिथि के नियम के मुताबिक रखा जाए तो अच्छा है।
कब रखें व्रत
जो लोग पूर्णिमा का व्रत रखते हैं वह 30 मई शनिवार को व्रत रख सकते हैं क्योंकि इस दिन चंद्रमा पूर्ण रूप में दिखाई देगा। दरअसल, व्रत का संबंध चंद्र दर्शन से माना जाता है। यही वजह है कि व्रत आज करना सही रहेगा।
कब करें स्नान दान
अगर आप स्नान दान करना चाहते हैं तो 31 मई रविवार का दिन अच्छा रहेगा। इसके लिये शुभ मुहूर्त 4 बजकर 3 मिनट से 4 बजकर 43 मिनट तक रहेगा।
बहुत फलदायक है ज्येष्ठ पूर्णिमा
अधिक मास की पूर्णिमा का धार्मिक महत्व बहुत खास है। इस दिन जो व्यक्ति भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करता है, उसके जीवन में सुख समृद्धि आती है। इस दिन चंद्र देव को अर्घ्य देने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है। इस दिन सत्यनारायण भगवान की पूजा और कथा करने का भी खास महत्व माना गया है। पूर्णिम पर तीर्थ स्नान का भी विशेष महत्व माना गया है।
Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News न्यूज़ नहीं करता।






