उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज अंतर राष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर राजधानी लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए, उन्होंने यहाँ अरण्य समागम ‘वन एवं अर्थव्यवस्थाएं’ विषयक राष्ट्रीय वानिकी संवाद का उद्घाटन किया, इस अवसर पर वन विभाग द्वारा प्रकाशित कॉफी टेबल बुक का विमोचन, मानव और वन्य जीव संघर्ष के दौरान असाधारण साहस का परिचय देने वाले बहादुर बच्चों, वन विभाग के द्वारा उत्कृ​ष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों, सामाजिक संगठनों को सम्मानित किया गया साथ ही कार्बन क्रेडिट चेक का वितरण भी हुआ।

योगी आदित्यनाथ ने कहा वन संरक्षण जीव सृष्टि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ‘माता भूमि: पुत्रोऽहं पृथिव्या:’ के मूलमंत्र के साथ डबल इंजन सरकार प्रदेश के पारिस्थितिकी संतुलन को और बेहतर बनाने हेतु प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी वन प्रेमियों को हृदय से बधाई दी एवं देश भर से आए हुए वन विभाग से जुड़े प्रकृति प्रेमियों का स्वागत किया।

प्रकृति से छेड़छाड़ का दुष्परिणाम दुनिया भुगत रही है 

योगी ने कहा वन जीवन का आधार और प्रकृति के संतुलन का भी एक महत्वपूर्ण आयाम प्रस्तुत करता है, यदि वन हैं तो जल है, जल और वन हैं तो वायु है, और अगर वायु है तो जीवन है उन्होंने कहा वैदिक काल की वन संपदा और आज की वन संपदा को देखेंगे तो समझ आयेगा कि व्यक्ति ने प्रकृति के साथ कितनी छेड़छाड़ की है इसलिए आज हम इसका दुष्परिणाम भुगत रहे हैं, पूरा मौसम चक्र बदल चुका है।

यूपी में पिछले 9 वर्षों में 242 करोड़ वृक्षारोपण किये गए 

योगी ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में हम लोगों ने पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश के अंदर वनाच्छादन को बढ़ाने में सफलता प्राप्त की है, हमने हम लोगों ने पिछले 9 वर्षों में 242 करोड़ वृक्षारोपण करने में सफलता प्राप्त की है, उन्होंने कहा हम लोगों ने कार्बन फाइनेंस प्रोजेक्ट के अंतर्गत कार्बन क्रेडिट के लिए कृषकों को धनराशि वितरण का कार्य किया है, उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने इस दिशा में कार्यक्रम को आगे बढ़ाया है।

वनों का संरक्षण मनुष्य की जिम्मेदारी 

योगी आदित्यनाथ ने कहा वन हैं तो बाघ हैं, बाघ हैं तो जैव विविधता है, जैव विविधता है तो जीव सृष्टि है, जीव सृष्टि है तो मानव सभ्यता है…इसलिए वन संरक्षण केवल मानव सभ्यता के लिए नहीं जीव सृष्टि के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जीव सृष्टि में इशेवर की सर्वश्रेष्ठ कृति मनुष्य है तो मनुष्य की सबसे बड़ी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि हम इस जिम्मेदारी को अपने ऊपर लें और वन संरक्षण के लिए अपने स्तर पर प्रयास करें।