कारगिल विजय दिवस पर गरजे सीएम योगी, बोले-“पाकिस्तान के आतंकी कैंपों को तहस-नहस करने में भारत की सेना को 22 मिनट भी नहीं लगे”

योगी ने कहा हमारी सरकार ने तय किया है,'अग्निवीर' के रूप में जो जवान देश की सेनाओं में अपना योगदान दे रहे हैं, जब वे जवान रिटायर हो कर आएंगे, उत्तर प्रदेश पुलिस बल में हम ऐसे जवानों को 20% आरक्षण देने की व्यवस्था कर रहे हैं...
Kargil Vijay Diwas, CM Yogi

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज राजधानी लखनऊ में आयोजित कारगिल विजय दिवस कार्यक्रम में  भारत माता के महान सपूतों के परिजनों को सम्मानित कर वीर जवानों की स्मृतियों को नमन किया। उन्होंने देश की एकता और अखंडता के लिए अपने प्राणों को न्योछावर करने वाले सभी वीर बलिदानियों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की, योगी ने कहा जब भी भारत की आन-बान और शान के खिलाफ किसी दुश्मन ने दुस्साहस किया तब भारत के वीर जवानों ने अपने जीवन का बलिदान देकर देश की एकता-अखंडता को अक्षुण्ण रखा।

कारगिल विजय दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए योगी ने कहा कि हम सब जानते हैं कि कारगिल का युद्ध पाकिस्तान द्वारा थोपा गया एक युद्ध था, 1999 में कारगिल के पास पहाड़ियों पर घुसपैठियों की सूचना चरवाहों ने सेना को दी, सेना ने सरकार को सूचना दी और उसके बाद चेतावनी देने के बाद भी पाकिस्तान की तरफ से हमला होता रहा तो फिर हमारी सेना ने उसका मुंहतोड़ जवाब दिया।

योगी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को किया याद 

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए योगी ने कहा कारगिल युद्ध के समय अटल जी ने ऑपरेशन विजय शुरू किया और फिर पाकिस्तान को तगड़ा जवाब देकर पूरी दुनिया को चौंकाया था क्योंकि कारगिल एक चुनौती वाला क्षेत्र था, पाकिस्तान के सैनिक ऊपर पहाड़ी पर थे और हमारे सैनिक नीचे लेकिन हमारी सेना के पराक्रम के सामने कायर पाकिस्तान टिक नहीं पाया और भाग खड़ा हुआ।

पुलवामा का बदला लेने में भारत की सेना को 22 मिनट भी नहीं लगे

योगी ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कि पुलवामा अटैक के बाद मोदी जी ने कहा था जिसने ये दुस्साहस किया उसे इसकी कीमत चुकानी होगी और हमारी सेनाओं को पाकिस्तान के आतंकी कैंपों को तहस-नहस करने में 22 मिनट भी नहीं लगे, इस बार भी पाकिस्तान कारगिल के युद्ध के समय की तरह फिर अमेरिका के पास गया लेकिन भारत नहीं रुका भारत ने एक साथ कई मोर्चों पर युद्ध लड़ा और जीता।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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